अधूरी बातों का एक अधूरा शाम

राहुल उस शाम बस ऐसे ही घर से निकल आया था। माँ ने दरवाज़े पर खड़े होकर कहा था, “जा बेटा, थोड़ा हवा खा ले। रोज़-रोज़ कमरे में बंद रहता है, चेहरा देखने लायक नहीं रह गया।” वह हल्के से मुस्कुराया था, कुछ कहा नहीं। बाहर निकलते ही शहर की सड़कें लगीं, वही पुरानी गलियाँ, वही दुकानें, पर मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी। जैसे कुछ चाहिए हो, पता नहीं क्या।

मेले की तरफ़ पैर खुद-ब-खुद चल पड़े। वहाँ की भीड़, रोशनी, बच्चों की चीखें—सब कुछ था, पर राहुल का ध्यान कहीं और था। बस चलता रहा, आँखें इधर-उधर घूम रही थीं, बिना किसी खास उम्मीद के।

भीड़ में अचानक प्रिया दिख गई। लाल साड़ी में, बाल खुले, हाथ में एक छोटा गुब्बारा। बच्चों के साथ हँस रही थी। राहुल की नज़र ठहर गई। कुछ पल देखता रहा, फिर खुद को खींचते हुए आगे बढ़ा।

“प्रिया?” उसने हल्के से आवाज़ दी।

प्रिया पलटी। एक सेकंड को चौंकी, फिर मुस्कुरा दी। “अरे राहुल? तू यहाँ?”

“हाँ यार, बस ऐसे ही घूमने आया। तू?”

“बच्चों को लेकर आई हूँ। कॉलेज के कुछ बच्चे साथ हैं।” उसने पीछे इशारा किया। “तू अकेला?”

“हाँ। कभी-कभी अकेले ही अच्छा लगता है।”

दोनों साथ चल पड़े। बातें छोटी-छोटी शुरू हुईं – मौसम, कॉलेज, शहर में क्या-क्या बदल रहा है। लेकिन हर बात के बीच में कुछ अनकहा सा था। राहुल को प्रिया की बातों में एक सच्चाई दिखती थी। प्रिया को राहुल की आँखों में कुछ ऐसा लगता था जो लंबे समय बाद महसूस हो रहा था।

कुछ दिन बाद कॉलेज के प्रोग्राम में फिर मिले। प्रिया स्टेज पर कविता पढ़ रही थी। राहुल पीछे बैठा सुन रहा था। जब प्रिया ने नज़र उठाई तो एक पल को आँखें मिल गईं। बस। दिल में कुछ हलचल हुई।

प्रोग्राम खत्म होने के बाद प्रिया बाहर आई। राहुल वहीं खड़ा था।

“कविता अच्छी थी,” उसने कहा।

“सच में? तूने सुनी?”

“हाँ, पूरी।”

दोनों कैंटीन चले गए। कॉफ़ी पीते हुए बातें होने लगीं। प्रिया ने धीरे से कहा, “घर वाले एक लड़के की बात कर रहे हैं। अच्छी जॉब है उसकी। लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा।”

राहुल चुप रहा। फिर बोला, “माँ भी रोज़ कहती है – देख ले किसी को। उम्र हो रही है।”

प्रिया ने उसकी तरफ़ देखा। “तुझे क्या लगता है? शादी में सिर्फ़ ज़िम्मेदारी ही काफी है?”

राहुल ने एक पल सोचा। “नहीं यार। अगर दिल न लगे तो रोज़-रोज़ का बोझ लगता है।”

प्रिया की आँखें थोड़ी सी भर आईं। “कभी-कभी लगता है मैं बहुत सोचती हूँ। शायद सब ऐसे ही चल जाता।”

“नहीं,” राहुल ने कहा। “कुछ चीज़ें दिल से तय करनी पड़ती हैं।”

उस रात दोनों देर तक फोन पर बात करते रहे। हँसी भी हुई, चुप्पी भी। हर चुप्पी में एक सवाल था।

फिर एक दिन तेज़ बारिश हुई। प्रिया कॉलेज से निकल रही थी, छाता नहीं था। राहुल बाइक पर था। देखा तो रुक गया।

“चल, मैं छोड़ दूँ?” उसने पूछा।

प्रिया ने एक पल हिचकिचाया। “ठीक है।”

बारिश में दोनों बाइक पर। प्रिया पीछे बैठी। हाथ हल्के से राहुल के कंधे पर। बूँदें चेहरे पर पड़ रही थीं, लेकिन ठंड नहीं लग रही थी। राहुल धीरे-धीरे चला रहा था।

प्रिया ने धीमे से कहा, “राहुल… मुझे डर लग रहा है।”

“किस बात का?”

“इस बात का कि अगर मैंने मन की सुनी तो सब कुछ बदल जाएगा। घर वाले, लोग… सब।”

राहुल ने बाइक साइड में रोकी। बारिश अभी भी हो रही थी। मुड़कर प्रिया की तरफ़ देखा।

“मुझे भी डर है,” उसने कहा। “पर इससे ज़्यादा डर इस बात का है कि अगर मैंने कुछ न बोला तो बाद में पछताऊँगा।”

प्रिया ने आँखें उठाईं। “तू सच में ऐसा सोचता है?”

“हाँ। मैं तुझे बहुत दिनों से देख रहा हूँ। तेरी छोटी-छोटी बातें, हँसी, गुस्सा… सब अच्छा लगता है। पता नहीं आगे क्या होगा, पर तेरे बिना मन अधूरा सा लगता है।”

प्रिया चुप रही। फिर बोली, “मैं भी यही महसूस करती हूँ। लेकिन इतना आसान नहीं है ना।”

“पता है। पर क्या हम कोशिश नहीं कर सकते?”

प्रिया ने उसकी आँखों में देखा। लंबे वक्त तक। फिर हल्के से सिर हिलाया।

उसके बाद बातें कम हुईं, लेकिन नज़रें ज़्यादा मिलने लगीं। छोटे-छोटे मैसेज, मिलने के बहाने। दोनों जानते थे कि परिवार को पता नहीं चलेगा अभी, लेकिन सच छिप नहीं सकता ज़्यादा देर।

एक शाम राहुल की माँ ने कहा, “बेटा, एक लड़की देखी है। बहुत अच्छे घर से। कल मिलने आ रही है।”

राहुल का दिल धक से रह गया। उसने प्रिया को कॉल किया।

“माँ ने लड़की देख ली है,” उसने कहा।

प्रिया की आवाज़ काँप रही थी। “अब तू क्या करेगा?”

“पता नहीं यार। बस इतना जानता हूँ कि तेरे बिना नहीं रह पाऊँगा।”

दोनों चुप हो गए। फोन पर सिर्फ़ साँसें सुनाई दे रही थीं।

“राहुल,” प्रिया ने कहा। “मैं नहीं चाहती कि तू मेरे लिए घर से लड़ाई करे। लेकिन मैं यह भी नहीं चाहती कि हम अलग हो जाएँ।”

“तो क्या करें?”

“थोड़ा वक्त लेते हैं। देखते हैं दिल क्या कहता है। अगर यह सच है तो कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।”

राहुल ने गहरी साँस ली। “ठीक है। बस इतना वादा कर कि तू मुझसे दूर नहीं जाएगी।”

“वादा। और तू भी।”

राहुल उस रात देर तक जागता रहा। कमरे की खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी, पर मन में एक अलग तरह की ठंडक थी। फोन पर प्रिया का आखिरी मैसेज अभी भी स्क्रीन पर चमक रहा था— “सो जा, कल बात करते हैं।” उसने जवाब नहीं दिया। बस देखता रहा, जैसे शब्दों में कुछ छिपा हो।

अगले दिन सुबह माँ ने लड़की के घर वालों से बात की। सब कुछ तय था—तारीख, मिलने का प्लान। राहुल ने चुपचाप सुना। जब माँ ने पूछा, “क्या कहता है बेटा?” तो उसने बस इतना कहा, “देखते हैं।” आवाज़ में न हाँ थी, न ना।

दोपहर को प्रिया से मिला। कॉलेज के पीछे वाली पुरानी बेंच पर, जहाँ कोई नहीं आता। दोनों चुप बैठे रहे कुछ देर। फिर प्रिया ने धीरे से कहा, “मैंने घर वालों से बात की। उन्होंने कहा है कि अगर मन नहीं है तो ज़बरदस्ती नहीं करेंगे। लेकिन… वो भी इंतज़ार कर रहे हैं।”

राहुल ने ज़मीन की तरफ़ देखा। “मेरी तरफ़ भी यही है। माँ को लगता है मैं बस हाँ कर दूँगा।”

प्रिया ने उसका हाथ हल्के से छुआ। “राहुल, मैं नहीं जानती कि हम दोनों का क्या होगा। शायद हम साथ आएँ, शायद नहीं। पर मुझे बस इतना पता है कि आज जो मैं महसूस कर रही हूँ, वो झूठ नहीं है। और अगर ये सच है, तो शायद किसी दिन हमें इसका जवाब मिल जाए।”

राहुल ने उसकी तरफ़ देखा। आँखों में नमी थी, पर मुस्कान भी। “मुझे भी यही लगता है। मैं बस इतना चाहता हूँ कि हम दोनों कभी ये न सोचें कि हमने कोशिश ही नहीं की।”

दोनों कुछ देर और बैठे रहे। न कोई वादा किया, न कोई बड़ा फैसला। बस इतना कि जब उठे, तो हाथ थोड़ा देर तक एक-दूसरे में जुड़े रहे। फिर अलग हुए—राहुल अपनी तरफ़, प्रिया अपनी तरफ़।

शाम को घर लौटते वक्त राहुल ने आसमान देखा। बादल छंट रहे थे। मन में भी कुछ वैसा ही था—न पूरा साफ़, न पूरी तरह अंधेरा। बस एक हल्की सी उम्मीद, जो अभी कायम थी।

शायद कल कुछ और होगा। शायद नहीं।

पर आज, उस हल्की सी उम्मीद के साथ जीना भी काफी था।

क्या आपने कभी ऐसा प्यार महसूस किया जो सही समय पर नहीं आया? राहुल और प्रिया की यह कहानी छोटे शहर की सच्चाई है—जहाँ दिल और परिवार के बीच का फासला बहुत बड़ा लगता है। ❤️ अगर आपको भी ऐसी अधूरी बातें याद आती हैं तो कमेंट में बताइए। Save कर लीजिए, शेयर करिए, और अपने उस खास इंसान को टैग कर दीजिए जिसके साथ बातें अधूरी रह गईं। #HindiShortStory #RealLoveStory #SmallTownLove #DilSeDilTak #UPSCouple #EmotionalStory #HindiKahani

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