Cousin Brother Sister Sex Kahani – मेरा चचेरा भाई मुझे अपनी हवस का गुलाम बना दिया और अब मेरी चूत को उसकी चुदाई की आदत पड़ गई—एक भावुक और सेक्सी कहानी
मेरा नाम राधिका है। मैं 24 साल की हूँ, गोरी, जवान और भरे हुए जिस्म वाली लड़की। मेरी चूचियाँ बड़ी, गोल और रसीली हैं, जैसे दो पके संतरे, जो मेरी कुर्ती या टी-शर्ट में हमेशा उभरे रहते हैं। मेरे निप्पल सख्त और गुलाबी हैं, जो कपड़े के ऊपर से हल्के-हल्के नज़र आते हैं। मेरी कमर पतली है, और मेरी गाँड मोटी, नरम और गोल है, जो चलते वक्त लचकती है और मर्दों की नज़रें उस पर ठहर जाती हैं। मेरी जाँघें मोटी और चिकनी हैं, जैसे मलाई की परत, और मेरी चूत की गर्मी मेरे चेहरे की मासूमियत से छिप नहीं पाती। मैं दिल्ली में अपने मम्मी-पापा के साथ रहती हूँ, लेकिन मेरी ज़िंदगी तब बदल गई जब मेरा चचेरा भाई, विशाल, मेरे घर आया। उसने मुझे चुदाई की ऐसी आदत लगाई कि अब मेरी चूत उसके बिना तड़पती है। ये मेरी कहानी है—शर्म, हवस और प्यार की कहानी।
विशाल का आना और मेरी बेचैनी की शुरुआत
ये फरवरी 2025 की बात है। दिल्ली में सर्दी अभी बाकी थी, और हवा में ठंडक थी। विशाल, मेरा चचेरा भाई, 27 साल का था। वो लखनऊ से दिल्ली अपनी नौकरी के सिलसिले में आया था। मम्मी-पापा ने उसे हमारे घर ठहरने को कहा। “राधिका, विशाल को अपना भाई समझो,” मम्मी ने कहा। मैंने हँसकर हाँ कहा, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो मेरा भाई नहीं, मेरी चूत का मालिक बनने वाला था। विशाल गोरा, लंबा और मज़बूत था। उसकी चौड़ी छाती और गहरी आँखें किसी को भी ललचा सकती थीं। पहली बार जब वो घर आया, उसने मुझे गले लगाया। “राधिका, तू तो बड़ी हो गई,” उसने कहा। उसकी बाहें मेरे जिस्म से चिपकीं, और उसकी साँसें मेरे गले को छू रही थीं। “हाँ भाई, तुम भी तो जवान लग रहे हो,” मैंने हँसते हुए कहा, लेकिन मेरे दिल में कुछ हलचल हुई।
पहले कुछ दिन तो सब ठीक था। मैं कॉलेज जाती, और वो अपनी नौकरी पर। लेकिन रातें मेरे लिए मुश्किल होने लगीं। विशाल मेरे बगल वाले कमरे में सोता था। एक रात मैं पानी लेने किचन गई। मैंने पतली सी नाइटी पहनी थी, जो मेरे जिस्म से चिपक रही थी। मेरी चूचियाँ नाइटी में उभरी थीं, और मेरे निप्पल सख्त थे। मैं किचन में थी जब विशाल पीछे से आया। “राधिका, इतनी रात को क्या कर रही हो?” उसने पूछा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्मी थी। “भाई, पानी लेने आई,” मैंने कहा और पलटी। उसकी नज़रें मेरी चूचियों पर ठहर गईं। “राधिका, तू बहुत खूबसूरत है,” उसने कहा और मेरे पास आ गया। उसका हाथ मेरी कमर पर रखा। “आह्ह… भाई… ये क्या?” मैं सिसक पड़ी। “राधिका, शांत रह,” वो बोला और मेरे गाल पर हाथ फेरा। उसकी उंगलियाँ मेरे होंठों तक गईं। मेरी चूत गीली हो गई। “भाई, ये गलत है,” मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज़ में कमज़ोरी थी।
पहली रात: चुदाई की शुरुआत
17 फरवरी की रात थी। मम्मी-पापा किसी शादी में गए थे, और घर में सिर्फ मैं और विशाल थे। मैं अपने कमरे में थी। मैंने लाल टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे। मेरी चूचियाँ टी-शर्ट में उभरी थीं, और मेरी जाँघें नंगी थीं। विशाल मेरे कमरे में आया। “राधिका, अकेले बोर हो रही हो?” उसने पूछा और मेरे बगल में बेड पर बैठ गया। “हाँ भाई, थोड़ा,” मैंने कहा। वो मेरे करीब खिसक आया। “राधिका, मैं तुझे खुश कर दूँ?” उसने कहा और मेरा हाथ पकड़ लिया। उसकी उंगलियाँ मेरी जाँघों पर फिसलीं। “आह्ह… भाई… मत करो,” मैंने कहा, लेकिन मेरी चूत तड़प रही थी। “राधिका, तुझे चुदाई की आदत डालूँगा,” वो बोला और मेरी टी-शर्ट ऊपर उठा दी। मेरी चूचियाँ नंगी हो गईं। मेरे निप्पल सख्त थे। “भाई, ये क्या?” मैंने शरमाते हुए कहा। “राधिका, तेरी चूचियाँ मस्त हैं,” वो बोला और एक चूची मुँह में ले लिया। उसकी जीभ मेरे निप्पल पर फिसली। “आह्ह… भाई… चूसो… आह्ह…” मैं सिसक पड़ी। उसका दूसरा हाथ मेरी दूसरी चूची को मसल रहा था। मेरी चूचियाँ लाल हो गईं।
उसने मेरे शॉर्ट्स उतार दिए। मेरी चूत नंगी थी। मेरी हल्की झाँटें गीली थीं। “राधिका, तेरी चूत कितनी मस्त है,” वो बोला और अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी। “आह्ह… भाई… धीरे…” मैं चीखी। उसकी उंगली मेरी चूत को चोद रही थी। “राधिका, तेरी चूत टाइट और गरम है,” वो बोला और दूसरी उंगली डाल दी। “आह्ह… और डालो… चोदो मुझे,” मैं तड़प रही थी। उसने अपनी पैंट उतारी। उसका 8 इंच का लंड सख्त, मोटा और काला था। उसकी टोपी गीली थी। “भाई, ये कितना बड़ा है,” मैंने डरते हुए कहा। “राधिका, ये तेरी चूत के लिए है,” वो बोला और मेरी टाँगें चौड़ी कर दीं। मेरी चूत खुल गई। मेरी जाँघें मोटी और गोरी थीं। उसने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। “आह्ह… भाई… डाल दो,” मैं चिल्लाई। उसने एक धक्का मारा। उसका लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया। “आह्ह… भाई… फट गई… आह्ह…” मैं चीखी। उसका लंड मेरी चूत को चीर रहा था। वो मेरी चूचियाँ दबाते हुए मुझे चोदने लगा। “राधिका, तेरी चूत मस्त है। मैं तुझे रंडी बना दूँगा,” वो बोला। हर धक्के से मेरी गाँड उछल रही थी। “भाई, और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो,” मैं चिल्ला रही थी।
गाँड की चुदाई और मेरी लत
उसने मुझे आधे घंटे तक चोदा। “राधिका, अब तेरी गाँड चोदूँगा,” वो बोला। उसने मुझे पलटा। मेरी गाँड गोल और नरम थी। उसने मेरी गाँड पर थूक दिया। “भाई, धीरे,” मैंने कहा। उसने अपनी उंगली मेरी गाँड में डाली। “आह्ह… भाई…” मैं सिसक पड़ी। फिर उसने अपना लंड मेरी गाँड में डाला। “आह्ह… फट गई… आह्ह…” मैं रो पड़ी। “राधिका, तेरी गाँड टाइट है,” वो बोला और मेरी गाँड चोदने लगा। उसकी उंगलियाँ मेरी चूत में थीं। “भाई, मेरी चूत भी चोदो,” मैंने कहा। उसने मुझे पलटा और मेरी चूत में लंड पेल दिया। “राधिका, तेरी चूत में झड़ूँगा,” वो बोला। उसने मुझे चोदा और मेरी चूत में माल छोड़ा। उसका गर्म माल मेरी चूत से बह रहा था। “भाई, ये क्या किया?” मैं हाँफते हुए बोली। “राधिका, तुझे चुदाई की आदत डाल दी,” वो बोला और मेरे होंठ चूसने लगा।
उस रात के बाद मेरी चूत को उसकी चुदाई की लत लग गई। हर बार जब मम्मी-पापा घर से बाहर जाते, वो मुझे चोदता। कभी बेड पर, कभी बाथरूम में। एक दिन उसने मुझे शावर के नीचे चोदा। मेरी चूत गीली थी। “भाई, फाड़ दो,” मैं चीखी। उसने मेरी गाँड और चूत दोनों चोदी। “राधिका, तू मेरी रंडी है,” वो कहता। मैं उसकी चुदाई की दीवानी हो गई। उसकी चूचियाँ चूसने की आदत, उसका लंड मेरी चूत में डालने का तरीका—सब मुझे पागल कर देता था।
आज की सच्चाई
अब मार्च 2025 चल रहा है। विशाल अभी भी हमारे घर है। हर रात जब मम्मी-पापा सो जाते हैं, वो मेरे कमरे में आता है। “राधिका, तेरी चूत को चोदूँ?” वो पूछता है। मैं अपनी टाँगें चौड़ी कर देती हूँ। वो मुझे चोदता है और मेरी चूत उसके माल से भर जाती है। मैं जानती हूँ ये गलत है, लेकिन मेरी चूत को उसकी चुदाई की आदत पड़ गई है। विशाल ने मुझे अपनी हवस का गुलाम बना दिया, और अब मैं उसकी रंडी हूँ।