मेरी चूत फट गई क्योंकि रात भर जीजा ने चोदा

Jiju Sali Sex Kahani : मेरी चूत फट गई क्योंकि रात भर जीजा ने चोदा : मेरा नाम पूजा है। मैं गाजियाबाद में अपने मम्मी-पापा के साथ रहती हूँ। मेरी बड़ी दीदी, शीतल, की शादी दो साल पहले हुई थी। उनका पति, मेरा जीजा, राहुल, दिल्ली में एक बड़ा बिजनेसमैन है। राहुल जीजा को पहली बार शादी में देखा था—लंबा कद, चौड़ा सीना, और वो कातिल मुस्कान जो किसी का भी दिल चुरा ले। मैं उस वक्त 22 की थी, और जीजा को देखते ही मेरे मन में कुछ अजीब सा हुआ था। उनकी आँखों में एक चमक थी, जो मुझे बार-बार अपनी ओर खींचती थी। लेकिन मैंने सोचा, “ये तो मेरे जीजा हैं, ऐसे ख्याल गलत हैं।” फिर भी, वो ख्याल मेरे दिमाग से निकलते ही नहीं थे।

पिछले महीने की बात है। दीदी को ऑफिस के काम से मुंबई जाना पड़ा। वो एक हफ्ते के लिए गई थीं। मम्मी-पापा गाँव गए थे किसी रिश्तेदार की शादी में। मैं घर पर अकेली थी। दीदी ने फोन करके कहा, “पूजा, राहुल को बोल दिया है कि वो तेरे पास रहेगा कुछ दिन। तुझे अकेले छोड़कर मुझे चिंता हो रही है।” मैंने हँसकर कहा, “दीदी, मैं अकेले रह सकती हूँ, लेकिन ठीक है, जीजा आ जाएँ तो अच्छा ही है।” मन में एक अजीब सी हलचल थी। जीजा के साथ अकेले रहने का ख्याल मेरे जिस्म में सिहरन पैदा कर रहा था।

शाम को जीजा आए। वो ब्लैक शर्ट और जींस में थे। उनकी शर्ट के बटन खुले थे, और सीने की मर्दानी चमक मुझे बेकरार कर रही थी। “पूजा, तू अकेली कैसे रहती?” उन्होंने हँसते हुए कहा। मैंने जवाब दिया, “जीजा, अब आप आ गए तो अकेलापन कहाँ?” वो मेरे पास सोफे पर बैठ गए। उनकी खुशबू मेरे नाक में घुस रही थी, और मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। मैं किचन में चाय बनाने गई। मेरी टाइट लेगिंग और कुर्ती में मेरी गांड मटक रही थी, और मुझे पता था कि जीजा की नजरें मुझ पर थीं। मैंने पीछे मुड़कर देखा—वो सच में मुझे घूर रहे थे। उनकी आँखों में एक भूख थी, जो मुझे गर्म कर रही थी।

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चाय लेकर मैं उनके पास बैठी। मेरी कुर्ती का गला थोड़ा गहरा था, और मेरी चूचियाँ हल्के से झाँक रही थीं। जीजा ने चाय का सिप लिया और बोले, “पूजा, तू तो अपनी दीदी से भी हॉट है।” मैं शरमा गई, लेकिन मन में खुशी हुई। मैंने कहा, “जीजा, आप भी तो कम नहीं हैं। दीदी लकी हैं।” वो हँसे और मेरे करीब सरक आए। उनका हाथ मेरे कंधे पर था, और उनकी उंगलियाँ मेरी गर्दन को छू रही थीं। “पूजा, आज रात हम दोनों हैं। क्या करें?” उन्होंने धीरे से कहा। मेरे जिस्म में बिजली दौड़ गई। मैंने हँसकर कहा, “जो आपका मन करे, जीजा।” उनकी आँखें मेरे होंठों पर टिक गईं, और मैं समझ गई कि रात लंबी होने वाली है।

रात के 10 बजे थे। मैं अपने कमरे में थी, और जीजा हॉल में टीवी देख रहे थे। मैंने सोचा कि नहा लूँ। बाथरूम में गर्म पानी की बौछार मेरे जिस्म पर पड़ रही थी। मेरी चूचियाँ सख्त हो गई थीं, और मेरी चूत में एक अजीब सी गुदगुदी थी। मैंने सोचा, “काश जीजा यहाँ होते।” तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। मैंने तौलिया लपेटा और बाहर आई। जीजा खड़े थे। “पूजा, पानी चाहिए था,” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी नजरें मेरे गीले जिस्म पर थीं। मेरा तौलिया थोड़ा सरक गया, और मेरी चूचियाँ आधी नंगी हो गईं। जीजा की साँसें तेज हो गईं। “जीजा, आप अंदर आ जाओ,” मैंने धीरे से कहा। वो मेरे पीछे बाथरूम में आए।

उन्होंने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से सटा दिया। “पूजा, तू बहुत गर्म है,” उन्होंने मेरे कानों में फुसफुसाया। उनके हाथ मेरे तौलिया पर गए, और एक झटके में उसे खींच दिया। मैं पूरी नंगी थी। मेरी चूचियाँ हवा में काँप रही थीं, और मेरी चूत गीली हो रही थी। जीजा ने मेरी चूचियों को अपने हाथों में लिया और जोर से दबाया। “उफ्फ, जीजा, धीरे,” मैंने सिसकते हुए कहा। वो बोले, “पूजा, तेरी चूचियाँ तो दूध से भरी हैं। इन्हें चूसना है मुझे।” उन्होंने मेरी एक चूची को मुँह में लिया और चूसने लगे। उनकी जीभ मेरे निप्पल पर घूम रही थी, और मैं पागल हो रही थी। मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं— “आह्ह, जीजा, क्या कर रहे हो?”

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उनके हाथ मेरी गांड पर चले गए। मेरी गांड गोल थी, मुलायम थी, और वो उसे मसल रहे थे। “पूजा, तेरी गांड तो मखमल है,” उन्होंने कहा और मुझे गोद में उठा लिया। वो मुझे बेडरूम में ले गए और बिस्तर पर पटक दिया। मैं नंगी लेटी थी, और मेरी चूत उनकी आँखों के सामने थी। जीजा ने अपनी शर्ट उतारी। उनका चौड़ा सीना और मजबूत बाजू देखकर मेरी साँसें थम गईं। उन्होंने अपनी जींस खोली, और उनका लंड बाहर आ गया—लंबा, मोटा, और सख्त। मैंने डरते हुए कहा, “जीजा, ये तो बहुत बड़ा है।” वो हँसे और बोले, “पूजा, तेरी चूत के लिए ही बना है ये।”

उन्होंने मेरी टाँगें फैलाईं और मेरी चूत पर अपनी जीभ रख दी। उनकी गर्म जीभ मेरी चूत को चाट रही थी, और मैं चिल्ला उठी— “आह्ह, जीजा, ये क्या कर रहे हो? मुझे पागल कर दोगे।” वो बोले, “पूजा, तेरी चूत का स्वाद शहद जैसा है।” उनकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, और मेरी चूत टपक रही थी। मैंने उनके बाल पकड़े और कहा, “जीजा, अब बर्दाश्त नहीं होता। मुझे चोद दो।” वो उठे और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं सिसक रही थी— “उफ्फ, जीजा, डाल दो न।”

उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा, और उनका लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं चीख पड़ी— “आह्ह, जीजा, मेरी चूत फट गई।” वो हँसे और बोले, “अभी तो शुरुआत है, साली।” उन्होंने मुझे चोदना शुरू किया। उनका लंड मेरी चूत को चीर रहा था, और मेरी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं। मैं चिल्ला रही थी— “आह्ह, जीजा, और तेज। मेरी चूत को फाड़ दो।” वो पागलों की तरह मुझे चोद रहे थे। उनकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं, और मेरे जिस्म में आग लग रही थी।

रात भर हमारी चुदाई चलती रही। कभी वो मुझे बिस्तर पर चोदते, कभी मुझे गोद में उठाकर मेरी गांड पर थप्पड़ मारते। उनकी उंगलियाँ मेरी चूत में थीं, और उनका लंड मेरे अंदर। एक बार मैं उनके ऊपर चढ़ी और उनकी छाती को चूमते हुए उनकी सवारी की। मेरी चूचियाँ उनके मुँह में थीं, और वो उन्हें चूस रहे थे। मैं चिल्लाई— “जीजा, मेरी चूत को भर दो।” उन्होंने मुझे पलटा और पीछे से मेरी चूत में लंड डाला। मेरी गांड पर उनके धक्के पड़ रहे थे, और मैं सिसक रही थी— “उफ्फ, जीजा, आप तो जान ले लोगे।”

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सुबह के 4 बजे तक वो मुझे चोदते रहे। मेरी चूत सूज गई थी, और मेरा जिस्म थक गया था। आखिरी बार उन्होंने मुझे दीवार से सटाकर चोदा। उनका लंड मेरी चूत में गहराई तक गया, और मैं चीख पड़ी— “जीजा, बस करो, मेरी चूत फट गई।” वो हँसे और बोले, “पूजा, तेरी चूत तो अब मेरी है।” उन्होंने अपना माल मेरी चूत में छोड़ दिया, और मैं निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी।

सुबह जब मैं उठी, तो मेरा जिस्म दर्द कर रहा था। मेरी चूत में जलन थी, और मेरी टाँगें काँप रही थीं। जीजा मेरे पास लेटे थे, और उनकी बाँहें मेरी कमर पर थीं। मैंने उन्हें देखा और सोचा, “ये मर्द मेरी जान ले लेगा।” वो जागे और मेरे होंठों को चूमते हुए बोले, “पूजा, तू कमाल है।” मैं शरमाई और बोली, “जीजा, आपने तो मुझे रात भर चोदा। मेरी चूत अब जवाब दे गई।” वो हँसे और मेरी चूचियों को दबाते हुए बोले, “अगली बार और मजा आएगा।”

उस रात के बाद मेरे और जीजा के बीच एक अनकहा रिश्ता बन गया। दीदी को कभी पता नहीं चला, लेकिन जीजा की वो चुदाई मेरे दिमाग में बस गई। मेरी चूत सच में फट गई थी, लेकिन उस दर्द में भी एक अजीब सा सुकून था। जीजा का लंड, उनकी भूख, और मेरी सिसकियाँ—ये सब मेरी जिंदगी का वो हिस्सा बन गया, जिसे मैं कभी भूल नहीं सकती।