कल रात दामाद ने मुँह दबाकर रगड़कर चोदा

कल रात का नशीला तूफ़ान – गाँव की सर्द रात थी। आसमान से बारिश की बूंदें टपक रही थीं, और हवा में एक ठंडक थी जो रानी के जिस्म को सिहरन दे रही थी। वह अपने छोटे से कमरे में बिस्तर पर लेटी थी, उसकी पतली साड़ी उसके गीले बदन से चिपकी हुई थी। उसका पति पिछले हफ्ते शहर गया था, और घर में सिर्फ़ उसका दामाद, विक्रम, रह गया था। रानी 35 साल की थी, लेकिन उसका जिस्म अभी भी किसी जवान लड़की की तरह था—उसकी चूचियाँ भरी हुई और सख्त, उसकी कमर पतली, और उसकी गांड गोल और मादक। उस रात उसका मन बेचैन था। अकेलापन उसे खाए जा रहा था, और उसकी चूत में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी। उसने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करने की कोशिश की, लेकिन उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं।

वह सोच में डूबी थी कि अचानक कमरे का दरवाज़ा चरमराया। रानी चौंकी और उठकर बैठ गई। दरवाज़े पर विक्रम खड़ा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, और उसकी साँसें तेज़ थीं। उसने सिर्फ़ एक काली बनियान और पैंट पहनी थी, जो उसके मज़बूत बदन को उभार रही थी। पानी की बूंदें उसकी गर्दन से नीचे सरक रही थीं, और उसकी चौड़ी छाती पर बनियान चिपक गई थी। “विक्रम, इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हो?” रानी ने पूछा, उसकी आवाज़ में डर और उत्तेजना का मिश्रण था।

विक्रम ने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और अंदर आया। उसने ताला लगा दिया, और उसकी नज़रें रानी के जिस्म पर टिक गईं। “सासू माँ, आपकी ये साड़ी… आपका ये बदन… मुझे रात भर नींद नहीं आने देता,” उसने कहा। उसकी आवाज़ में एक गहरी कामुकता थी, जो रानी के दिल को धड़कने पर मजबूर कर रही थी। रानी ने अपने पल्लू को कसकर पकड़ा, और बोली, “ये गलत है, विक्रम। तू मेरा दामाद है।”

विक्रम हँसा, उसकी हँसी में एक जंगलीपन था। “गलत-सही की बातें छोड़ो। तुम्हारी चूचियाँ, तुम्हारी गांड, तुम्हारी चूत की गर्मी—ये सब मुझे बुलाती है,” उसने कहा, और एक कदम आगे बढ़ाया। रानी ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन उसका बिस्तर दीवार से सटा था। इससे पहले कि वह कुछ और कह पाती, विक्रम ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। उसने रानी का मुँह अपने मज़बूत हाथ से दबा दिया, और दूसरा हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी चूचियों पर रख दिया।

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रानी की साँसें रुक गईं। उसने छटपटाने की कोशिश की, लेकिन विक्रम की पकड़ मज़बूत थी। “चुप रहो, सासू माँ,” उसने फुसफुसाया, और रानी की चूचियों को ज़ोर से दबाया। उसकी उंगलियाँ साड़ी के कपड़े को मसल रही थीं, और रानी की सिसकी उसके दबे हुए मुँह में ही रह गई। विक्रम ने रानी की साड़ी का पल्लू खींचकर फेंक दिया, और उसकी भरी हुई चूचियाँ ब्लाउज़ में कैद नज़र आईं। उसने ब्लाउज़ के हुक खोले, और रानी की नंगी चूचियाँ उसके सामने आ गईं। “क्या माल हो तुम,” उसने कहा, और अपने होंठ रानी की चूचियों पर रख दिए।

विक्रम ने रानी की चूचियों को चूसा। उसकी जीभ उनके निप्पलों पर घूम रही थी, और उसने उन्हें हल्के से काटा। रानी का जिस्म सिहर उठा। उसकी चूत में गर्मी बढ़ रही थी, और उसका विरोध धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ रहा था। विक्रम ने रानी की साड़ी को पूरी तरह खींचकर उतार दिया। अब वह सिर्फ़ पेटीकोट में थी, और उसका नंगा ऊपरी जिस्म बारिश की हल्की रोशनी में चमक रहा था। विक्रम ने रानी की टाँगें चौड़ी कीं, और उसकी चूत पर हाथ फेरा। “ये तो पहले से गीली है,” उसने हँसते हुए कहा, और अपनी दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं।

रानी की आँखें बंद हो गईं। उसका बदन तड़प रहा था, और उसकी चूत में एक मीठा दर्द उठ रहा था। उसने विक्रम के हाथ को हटाने की कोशिश की, लेकिन उसकी ताकत के आगे वह हार गई। विक्रम ने अपनी बनियान उतारी, और उसकी मज़बूत छाती रानी के सामने थी। उसने अपनी पैंट खोली, और अपना सख्त लंड बाहर निकाला। रानी की नज़र उस पर पड़ी, और उसका दिल ज़ोर से धड़का। विक्रम ने रानी की चूत पर अपना लंड रगड़ा, और फिर एक ज़ोरदार झटके में अंदर घुसा दिया।

रानी की चीख उसके दबे हुए मुँह में ही रह गई। विक्रम ने उसका मुँह और ज़ोर से दबाया, और उसे रगड़-रगड़कर चोदने लगा। उसका हर धक्का रानी के जिस्म को हिला रहा था। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, और उसकी गांड बिस्तर पर रगड़ खा रही थी। “तेरी चूत की गर्मी मुझे पागल कर देती है,” विक्रम ने कराहते हुए कहा। उसने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी, और रानी का दर्द धीरे-धीरे सुख में बदलने लगा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसकी चूत विक्रम के लंड को कसने लगी।

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विक्रम ने रानी का मुँह छोड़ा, और उसकी कराहें कमरे में गूँज उठीं। “आह… विक्रम… धीरे,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में अब विरोध नहीं, बल्कि एक मादक पुकार थी। विक्रम ने रानी की चूचियों को फिर से मसला, और उन्हें चूसते हुए कहा, “धीरे कहाँ से करूँ? तेरा ये जिस्म तो मुझे जंगली बना देता है।” उसने रानी को पलटा, और उसे घोड़ी की तरह खड़ा किया। रानी की गांड उसके सामने थी, गोल और मादक। विक्रम ने उसकी गांड पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा, और बोला, “तेरी गांड देखकर मेरा लंड और सख्त हो जाता है।”

उसने पीछे से रानी की चूत में अपना लंड डाला, और उसे फिर से चोदना शुरू कर दिया। रानी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। उसकी चूचियाँ हवा में झूल रही थीं, और उसकी गांड हर धक्के के साथ थरथरा रही थी। विक्रम ने रानी के बाल पकड़े, और उसे और ज़ोर से रगड़ा। “तेरी चुदाई की आग में मैं जल रहा हूँ,” उसने कहा, और उसकी गांड को सहलाते हुए उसे चोदता रहा। रानी अब टूट चुकी थी। उसने विरोध छोड़ दिया, और खुद ही अपनी गांड पीछे धकेलने लगी। “चोदो मुझे… और ज़ोर से,” उसने कराहते हुए कहा।

विक्रम ने रानी की बात सुनी, और अपनी पूरी ताकत से उसे चोदा। कमरे में उनकी साँसों की आवाज़, बिस्तर की चरमराहट, और रानी की सिसकियाँ गूँज रही थीं। बाहर बारिश तेज़ हो रही थी, लेकिन अंदर का तूफ़ान उससे कहीं ज़्यादा जंगली था। कई मिनटों तक ये सिलसिला चला। विक्रम ने रानी को फिर से पलटा, और उसके ऊपर चढ़ गया। उसने रानी के होंठों पर अपने होंठ रखे, और एक गहरी, गीली kiss की। उसकी जीभ रानी के मुँह में घुसी, और दोनों के जिस्म एक-दूसरे से चिपक गए।

रानी ने विक्रम के कंधों पर नाखून गड़ाए, और उसकी गांड को सहलाते हुए उसे और पास खींचा। “तेरा लंड… मेरी चूत को फाड़ देगा,” उसने फुसफुसाया। विक्रम हँसा, और बोला, “फटने दे, सासू माँ। तुझे आज रात मैं पूरा मज़ा दूँगा।” उसने रानी की चूचियों को फिर से चूसा, और उन्हें काटते हुए उसे चोदता रहा। रानी का जिस्म पसीने से तर था, और उसकी चूत हर धक्के के साथ गीली होती जा रही थी।

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फिर विक्रम ने रानी को अपने ऊपर खींचा। “अब तू मेरे लंड पर बैठ,” उसने कहा। रानी ने उसकी बात मानी, और विक्रम के सख्त लंड पर बैठ गई। उसने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होना शुरू किया। उसकी चूचियाँ विक्रम के मुँह के सामने हिल रही थीं, और उसने उन्हें चूसना शुरू कर दिया। रानी की सिसकियाँ तेज़ हो गईं। “आह… विक्रम… मेरी चूत में आग लग रही है,” उसने कहा। विक्रम ने रानी की गांड पर ज़ोर से चपत मारी, और बोला, “तो इस आग को और भड़कने दे।”

रानी ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। उसका जिस्म काँप रहा था, और उसकी चूत विक्रम के लंड को कस रही थी। विक्रम ने रानी की कमर पकड़ी, और उसे और ज़ोर से उछाला। दोनों के जिस्म एक-दूसरे में डूब गए थे। कई मिनटों तक ये खेल चला—कभी विक्रम ऊपर, कभी रानी। आखिर में, विक्रम ने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और रानी के अंदर झड़ गया। रानी भी उसी पल स्खलित हो गई। उसका जिस्म थरथरा रहा था, और वह विक्रम के सीने पर गिर पड़ी।

दोनों हाँफ रहे थे। रानी की चूचियाँ अभी भी लाल थीं, और उसकी चूत से गर्मी उठ रही थी। विक्रम ने रानी के होंठों पर एक लंबी kiss दी, और बोला, “ये रात मेरे लिए जन्नत थी, सासू माँ।” रानी चुप रही, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। “तूने मुझे तोड़ दिया,” उसने धीरे से कहा। विक्रम हँसा, और बोला, “अभी तो बहुत रातें बाकी हैं।”

रानी विक्रम के सीने पर सिर रखकर लेट गई। बाहर बारिश धीमी हो गई थी, लेकिन उनके जिस्मों की गर्मी अभी भी कमरे में फैली हुई थी। रानी सोच रही थी कि ये रात उसकी ज़िंदगी बदल देगी। विक्रम ने उसकी चूचियों को हल्के से सहलाया, और बोला, “कल फिर से?” रानी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी चुप्पी में हामी थी। दोनों एक-दूसरे की बाहों में सो गए, और बारिश की आवाज़ उनकी साँसों के साथ मिल गई।