मेरी नई पड़ोसन के जलवे पूरी रात

Hot New Padosan Sex Story : (अर्जुन की डायरी से)

15 मार्च 2025, रात 9 बजे

आज वो मेरे सामने वाले घर में शिफ्ट हुई। उसका नाम रिया है—मेरी नई पड़ोसन। जब वो ट्रक से सामान उतार रही थी, मैं बालकनी में खड़ा उसे देख रहा था। उफ्फ! क्या जलवा था उसका। टाइट कुर्ती में उसकी चूचियाँ ऐसे उभरी थीं जैसे किसी ने हवा भर दी हो। नीचे की लेगिंग उसकी मोटी गांड को चिपककर और हॉट बना रही थी। वो पसीने से तर थी, और उसकी कमर से लटकते बाल मेरे दिल में आग लगा रहे थे। मैंने सोचा, “ये औरत तो रातों की नींद उड़ा देगी।”
उसने मुझे देखा और एक शरारती मुस्कान दी। “हाय, मैं रिया हूँ,” उसने कहा, और उसकी आवाज में एक मादकता थी। मैंने जवाब दिया, “अर्जुन, आपका नया पड़ोसी। मदद चाहिए तो बताना।” वो हँसी और बोली, “रात को चाहिए होगी, तब बुलाऊँगी।” उसकी आँखों में चमक थी, और मेरे जिस्म में सिहरन दौड़ गई।

15 मार्च 2025, रात 11 बजे

मैं अपने कमरे में था, जब दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा खोला तो रिया खड़ी थी। उसने सिल्क की नाइटी पहनी थी—पतली, चमकदार, और इतनी टाइट कि उसकी चूचियाँ बाहर आने को बेताब थीं। उसकी गांड उस नाइटी में मटक रही थी, और होंठों पर लाल लिपस्टिक चमक रही थी। “अर्जुन, मेरा बल्ब फ्यूज हो गया। देख सकते हो?” उसने कहा। मैंने हाँ कहा और उसके घर गया।
उसका कमरा गर्म था। वो मेरे पास खड़ी थी, और उसकी साँसें मेरे कंधे को छू रही थीं। मैं बल्ब ठीक कर रहा था, जब उसने मेरे कान में फुसफुसाया, “तुम्हारे हाथ तो बड़े तेज हैं, और क्या-क्या ठीक कर सकते हो?” मैं पलटा और उसकी आँखों में देखा। “रिया, तुम कहो तो सब ठीक कर दूँ,” मैंने कहा। वो हँसी और बोली, “तो मेरी रात ठीक कर दो, अर्जुन।” उसकी ये बात मेरे सीने में आग लगा गई।

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16 मार्च 2025, रात 12:30 बजे

हम सोफे पर बैठे थे। उसने वाइन की बोतल खोली और मेरे लिए गिलास भरा। “पड़ोसी को वेलकम करना पड़ता है,” उसने कहा और अपने होंठों को गिलास से छुआया। उसकी जीभ लिपस्टिक पर फिसली, और मैं पागल हो गया। मैंने कहा, “रिया, तुम्हारे होंठ तो शराब से ज्यादा नशीले हैं।” वो मेरे करीब सरकी और बोली, “तो चख लो, अर्जुन।”
मैंने उसका गिलास छीना और उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया। वो गर्म थी—उसके होंठ रसीले, नरम, और शराब की महक से भरे। मेरे हाथ उसकी चूचियों पर चले गए। वो टाइट थीं, गोल, और नाइटी के ऊपर से उभरी हुई। मैंने उन्हें दबाया, और वो सिसक उठी। “अर्जुन, मेरी चूचियाँ तुम्हें बुला रही थीं,” उसने कहा। मैंने उसकी नाइटी का कंधा सरकाया, और उसकी गोरी चूचियाँ मेरे सामने नंगी हो गईं। मैंने उन्हें चूमा, चूसा, और वो “आह्ह” करते हुए मेरे बालों में उंगलियाँ फेरने लगी।

16 मार्च 2025, रात 1:15 बजे

उसने मुझे अपने बेडरूम में खींच लिया। कमरे में हल्की लाल रोशनी थी, और बिस्तर पर सिल्क की चादर बिछी थी। वो मेरे सामने खड़ी हुई और अपनी नाइटी उतार दी। उसकी नंगी गांड चाँदनी में चमक रही थी, और उसकी चूत के पास हल्की सी झाँटें मुझे पागल कर रही थीं। “अर्जुन, मेरे जलवे देखो,” उसने कहा और बिस्तर पर लेट गई। मैंने अपने कपड़े फेंके और उसके ऊपर चढ़ गया।
मेरे हाथ उसकी गांड को मसल रहे थे, और वो मेरे सीने को चूम रही थी। “रिया, तेरी गांड तो मखमल है,” मैंने कहा। वो हँसी और बोली, “तो इसे चोद दो, अर्जुन।” मैंने उसे पलटा और उसकी गांड पर हाथ फेरा। वो गर्म थी, मुलायम, और हर छूने से सिसक रही थी। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली—वो गीली थी, टपक रही थी। “आह्ह, अर्जुन, मुझे चोदो,” उसने चीखकर कहा। मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला, और वो चिल्ला उठी। हमारी चुदाई शुरू हो गई—तेज, गर्म, और पसीने से भरी।

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16 मार्च 2025, रात 2:45 बजे

पहली चुदाई के बाद हम थक गए थे, लेकिन रिया का नशा कम नहीं हुआ। वो मेरे सीने पर लेटी थी, और उसकी चूचियाँ मेरे जिस्म से चिपकी थीं। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और बोली, “अर्जुन, ये तो अभी भी तैयार है।” मैंने कहा, “तेरे जलवों के सामने ये कभी थकेगा नहीं।” वो हँसी और मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी, और वो अपनी गांड हिला रही थी। “अर्जुन, मेरी चूत को फिर से भर दो,” उसने कहा।
मैंने उसे नीचे लिटाया और उसकी टाँगें फैलाईं। उसकी चूत गुलाबी थी, गीली थी, और मुझे बुला रही थी। मैंने अपना लंड अंदर डाला, और वो “उफ्फ, जीजाजी—अर्जुन, चोदो मुझे” चिल्लाने लगी। मैंने उसे जोर-जोर से चोदा, और उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। उसकी सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं— “आह्ह, ओह्ह, और तेज!” हम दोनों पसीने से तर थे, और उस रात उसकी चुदाई ने मुझे जन्नत दिखा दी।

16 मार्च 2025, सुबह 4 बजे

हम बिस्तर पर नंगे पड़े थे। रिया मेरे बगल में लेटी थी, और उसकी साँसें अभी भी गर्म थीं। उसने मेरे होंठों को चूमा और बोली, “अर्जुन, तुमने मेरी रात बना दी।” मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए कहा, “रिया, तेरे जलवे तो पूरी जिंदगी याद रहेंगे।” वो हँसी और मेरे सीने से चिपक गई। उसकी चूचियाँ मेरे जिस्म को छू रही थीं, और उसकी गर्मी मुझे फिर से बेकरार कर रही थी। मैंने कहा, “एक बार और?” वो बोली, “पूरी रात तेरे लिए है, पड़ोसी।”
हम फिर एक-दूसरे में खो गए। उसकी चूत, उसकी गांड, उसके होंठ—हर चीज मुझे पागल कर रही थी। उस रात हमने बार-बार चुदाई की, और हर बार वो और हॉट लगी।

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16 मार्च 2025, सुबह 6 बजे

सूरज निकलने वाला था। हम थक चुके थे, लेकिन रिया की आँखों में अभी भी वही शरारत थी। वो मेरे पास लेटी थी, और उसकी नंगी चूचियाँ मेरे हाथ में थीं। “अर्जुन, ये तो बस शुरुआत है,” उसने कहा। मैंने हँसकर कहा, “रिया, तू सच में आग है।” वो बोली, “तो जलते रहो, पड़ोसी।”
उस सुबह मैं अपने घर लौटा, लेकिन मेरा दिल और जिस्म अभी भी उसके जलवों में डूबा था।

रिया मेरी पड़ोसन थी, लेकिन उसने मेरी रात को एक कामुक सपना बना दिया। उसकी चूचियाँ, उसकी गांड, उसकी चूत—हर चीज मेरे दिमाग में बसी थी। वो रात मेरे लिए एक नशा थी, एक आग थी, जो पूरी रात जलती रही। और मुझे पता है, ये जलवा अभी खत्म नहीं हुआ।