नमस्ते दोस्तों, मैं दिव्या हूं, 22 साल की वो हॉट और बेकाबू लड़की, जिसकी चूत में आग लगी रहती है। रोज़ रात को, जब घर वाले सो जाते हैं, मैं चुपके से फोन निकालती हूं और Nonvegstory.com पर घंटों बिताती हूं। वो साइट मेरी जिंदगी का राज़ है – वहां की हर चुदाई वाली कहानी पढ़कर मेरी चूत टपकने लगती है। लंड के मोटे धक्के, चूत फाड़ने वाले दृश्य, गालियां और वो कमुक कराहें… उफ्फ! मैं तो कल्पना करती हूं कि काश मेरी ज़िंदगी भी ऐसी हो। और अब, अपनी ही स्टोरी शेयर करने का वक्त आ गया। पिछली हफ्ते की बात है, मेरी शादी हुई। मैंने सोचा था शादी के बाद तो हर रात लंड की मस्ती होगी, लेकिन किस्मत ने मुझे वहशी भाइयों के हवाले कर दिया। पढ़िए मेरी पूरी कहानी, शुरुआत से अंत तक, एक ही धागे में बंधी। भरपूर चटपटी, लंबी, और कमुक शब्दों से सजी। अगर पढ़कर आपका लंड फड़क जाए या चूत गीली हो जाए, तो कमेंट में बताना। Nonvegstory.com पर ऐसी ही स्टोरीज़ की दीवानी हूं मैं, और अब आप भी हो जाओगे। चलिए, डुबकी लगाते हैं…
पिछले सप्ताह ही मेरी शादी थी। पापा ने मेरे लिए नौकरीशुदा लड़का, दिव्यांग लड़के से मेरी शादी करा दी। बाइस साल की उम्र में ही… और शादी के सात दिनों के अंदर ही मैंने अपनी दुनिया और वहशी दुनिया देख ली। मेरे पति ने मुझे सुहागरात के दिन छुआ तक नहीं। मुझे लगा शर्म आ गई होगी या ज्यादा थके होंगे। पर दो-तीन दिन बाद ही मुझे पता चला कि मेरा पति नामर्द है। उसका लंड खड़ा नहीं होता है। फिर क्या था, उसके दो और भाई – जो एक बड़ा है, एक छोटा – यानी मेरा जेठ अजय भैया और मेरा देवर राहुल – ने मेरी कुंवारी चूत का उद्घाटन कर दिया।
सुहागरात की वो रात… आज भी याद आते ही मेरी चूत सिकुड़ जाती है। हमारा कमरा फूलों से महक रहा था, लाल मखमली चादर बिछी हुई, और हवा में संदल की खुशबू। मैं लाल जोड़े में सजी हुई, माथे पर सिंदूर लगाए, बेड पर शरमाते हुए बैठी थी। मेरी सांसें तेज़ थीं – Nonvegstory.com पर पढ़ी हुई सारी चुदाई स्टोरीज़ दिमाग में घूम रही थीं। सोच रही थी, आज तो मेरा पति मेरा लंड का बादशाह बनेगा, मेरी चूत को चीर देगा, धक्के मार-मारकर मुझे चीखने पर मजबूर कर देगा। लेकिन वो कमरे में आया, बस मुस्कुराया, मेरे पैर छुए और बोला, “दिव्या, थकान हो गई है। कल सुबह बात करेंगे।” फिर लेट गया, और दो मिनट में सो गया। मैं चुपचाप उसके बगल में लेटी, लेकिन नींद कहां आने वाली थी? मेरी चूत में खुजली हो रही थी, जैसे कोई चींटियां रेंग रही हों। रात भर मैंने कल्पना की – किसी मोटे, सख्त लंड का सिरा मेरी चूत पर रगड़ते हुए अंदर घुसते हुए, वो जोरदार धक्के, और मेरी कराहें। सुबह उठी तो चादर पर एक दाग था – मेरी चूत का रस।
अगले दो दिन बीत गए। घर में हंसी-खुशी का माहौल, लेकिन मेरी चूत अभी भी कुंवारी, प्यासी। तीसरे दिन शाम को, मैं किचन में सब्ज़ी काट रही थी। साड़ी की परतें मेरी कमर से चिपकी हुईं, पसीना बह रहा था। तभी पीछे से एक गर्म सांस महसूस हुई। मेरा देवर राहुल, 20 साल का जवान घोड़ा जैसा लड़का, चुपके से आया। वो शादी से पहले से मुझे घूरता था – मेरी गांड की लाइनें, चूचियों का उभार। “भाभी, सब्ज़ी कितनी तीखी बना रही हो? तेरी तरह?” कहते हुए उसका हाथ मेरी कमर पर सरका। मैं चौंक गई, चाकू हाथ से छूट गया। “राहुल, क्या बकवास कर रहे हो? मैं तेरी भाभी हूं!” लेकिन मेरी आवाज़ कांप रही थी। उसकी उंगलियां मेरी साड़ी के नीचे घुस गईं, मेरी नाभि पर घुमाईं। “भाभी, भैया तो नामर्द हैं। मैंने नंगा होते देखा है बाथरूम से झांककर। उनका लंड फ्लॉप सा लटकता रहता है, खड़ा ही नहीं होता। तेरी ये जवान, रसीली चूत बर्बाद हो जाएगी।” उसके शब्द सुनकर मैं शरमा गई, लेकिन चूत में एक झनझनाहट हुई। Nonvegstory.com पर ऐसी ही देवर-भाभी वाली स्टोरीज़ पढ़ी थीं – चुपके से चुदाई, गालियां, और वो मज़ा।
वो मुझे घुमाया, किचन की दीवार से सटा दिया। उसके होंठ मेरे होंठों पर चिपक गए – गर्म, गीले। जीभ अंदर घुसा दी, चूसने लगा जैसे कोई भूखा शेर। मैं विरोध करने की कोशिश की, हाथ ठेला, लेकिन मेरी चूत से रस टपकने लगा। पेटीकोट गीला हो गया। “राहुल… रुक जा… सासुजी आ जाएंगी…” मैं फुसफुसाई। लेकिन वो रुका नहीं। हाथ मेरी ब्लाउज़ में घुसा, ब्रा ऊपर की, और मेरी चूचियां दबा दी। मेरे निप्पल सख्त हो चुके थे, जैसे दो लाल चेरी। “भाभी, तेरी चूचियां कितनी मोटी, रसीली हैं। भैया को क्या पता, मैं रोज़ रात तेरी शादी की फोटोज़ देखकर मुठ मारता हूं। कल्पना करता हूं कि तेरी चूत में धक्का मार रहा हूं।” कहते हुए उसने मेरी साड़ी खींच ली। मैं सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में खड़ी थी, मेरी चूत की उभार साफ़ दिख रहा था। पैंटी तो पहनी ही नहीं थी आज – शादी के बाद की आदत।
अचानक किचन का दरवाज़ा खुला। मेरा जेठ अजय भैया, 28 साल का मज़बूत, गठीला आदमी, खड़ा था। जिम जाता है वो, बॉडी सॉलिड। वो हंस पड़ा, आंखों में चमक। “अरे राहुल, तू तो आग बुझाने की जल्दी में है। भाभी को तो हम दोनों मिलकर संभालेंगे।” मैं घबरा गई, हाथों से चूचियां ढकने लगी। “भैया… ये… ये क्या कर रहे हो? मैं… मैं चली जाऊं?” लेकिन अजय भैया ने दरवाज़ा लॉक किया और धीरे से आया। “दिव्या रानी, चिंता मत कर। भैया नामर्द है, लेकिन हम तेरी चूत की प्यास बुझाएंगे। तू Nonvegstory.com पर चुदाई वाली स्टोरीज़ पढ़ती है ना? मैंने तेरे फोन की हिस्ट्री चेक की है। रात को उंगली डालकर पढ़ती है, है ना?” मैं शॉक्ड हो गई। हां, पढ़ती हूं, लेकिन ये… ये तो मेरी प्राइवेसी। लेकिन अंदर से उत्साह भी। “भैया, प्लीज… कोई न देखे।”
अजय भैया ने मुझे गोद में उठा लिया – जैसे कोई खिलौना। मैं हल्की हूं, 50 किलो। वो मुझे सीधे बेडरूम में ले गए। राहुल ने लाइट डिम कर दी, कर्टेन बंद। कमरा अंधेरा, लेकिन रोमांचक। वो मुझे बेड पर लिटाया, नरम गद्दे पर। “दिव्या, तेरी कुंवारी चूत आज हमारी हो जाएगी। तैयार?” अजय भैया ने मेरी पेटीकोट ऊपर सरका दी। मेरी चूत नंगी, गुलाबी, रसीली, और हल्के बालों से सजी। रस चमक रहा था। “वाह भाई, कितनी टाइट, सुंदर चूत है। कभी छुई भी नहीं गई।” राहुल ने कहा और अपना मुंह झुका दिया। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत पर लगी – लिज़ लिज़ चाटने लगा। क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई, होंठ चूसे। उफ्फ! बिजली सी कौनचली। “आह… राहुल… ओह्ह… मत चाटो… शरम आ रही है…” मैं चीखी, लेकिन टांगें अपने आप फैल गईं। मेरी चूत का रस उसके मुंह में बह रहा था। “भाभी, तेरा रस तो शहद जैसा मीठा है। चाटते रहूंगा घंटों।”
अजय भैया ने अपनी शर्ट उतारी – छाती चौड़ी, मसल्स तनी हुई। फिर पैंट खोली। उनका लंड… ओह माय गॉड! 8 इंच लंबा, मोटा काला सांप, सिरा लाल और चमकदार, नसें फूली हुईं। “देख भाभी, ये असली लंड है। भैया का तो रबड़ का खिलौना।” वो लंड मेरी जांघ पर रगड़ने लगा। गर्मी महसूस हुई। मैं डर गई, लेकिन चूत और गीली हो गई। अजय भैया ने मेरी ब्लाउज़ खोल दी, ब्रा फाड़ दी। मेरी चूचियां उछल आईं – 34 साइज़, गोल, भारी। वो एक चूची मुंह में भर लिया, चूसने लगा। निप्पल काटा, दांतों से नोचा। दर्द हुआ, लेकिन मज़ा दोगुना। “आह भैया… हल्के… ओह्ह… चूसो और…” मैं कराह रही थी। राहुल चाटते-चाटते उठा, अपनी पैंट उतारी। उसका लंड 7 इंच का, पतला लेकिन सीधा। वो मेरे मुंह के पास आया, लंड रगड़ा। “भाभी, चूस ले ना। पहली बार चूत चुदेगी, लेकिन मुंह तो रंडी बना सकती है।” मैंने आंखें बंद कीं, होंठ खोले, और चूस लिया। नमकीन, गर्म स्वाद। जीभ घुमाई, चूसा, गले तक लिया। वो सिसकारियां भर रहा था – “हां भाभी… साली कुमारी रंडी… कितना अच्छा चूस रही है… मुठ मारने से बेहतर।”
अब असली खेल शुरू हुआ। अजय भैया ने अपना लंड मेरी चूत के द्वार पर रखा। सिरा रगड़ा, रस से चिकना किया। “दिव्या, दर्द होगा पहले, लेकिन मज़ा आएगा। तैयार?” मैं सिर हिलाई, “भैया… धीरे से… फाड़ न देना।” वो मुस्कुराया और एक ज़ोरदार धक्का मारा। आआआह्ह्ह! मेरी चूत फट गई। सील टूटी, खून निकला, दर्द की लहर दौड़ी। लेकिन उसके साथ एक मीठा सुख। लंड अंदर समा गया, चूत की दीवारें चिपक गईं। “कितनी टाइट है तेरी चूत… साली कुंवारी रंडी… चोदूंगा तुझे रोज़।” वो गालियां दे रहा था, जो मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। धक्के शुरू – धड़-धड़-धड़। हर धक्के से मेरी चूचियां उछल रही थीं, बेड हिल रहा था। प्लॉप-प्लॉप की आवाज़, रस की चाप। “चोदो भैया… और ज़ोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह…” मैं चिल्ला रही थी। राहुल अब मेरे मुंह में लंड ठोंक रहा था – गला भरता हुआ। “भाभी, तू पैदाईशी रंडी है। चूस… हां…”
वे घंटों चोदते रहे। कभी पॉज़िशन बदलते। अजय भैया ने मुझे मिशनरी में रखा, टांगें कंधों पर, गहराई से धक्के मारे। मेरी चूत अंदर से मसली जा रही थी। “दिव्या, तेरी चूत का अंदरूनी हिस्सा कितना गर्म है… झड़ने वाला हूं…” लेकिन रुका, निकाल लिया। राहुल ने अब चूत में घुसाया। उसका लंड पतला था, लेकिन स्पीड तेज़। “भाभी, तेरी चूत भैया के वीर्य से चिकनी हो गई। चोद रहा हूं… हां…” मैं पागल हो रही थी। चूचियां मसल रही थीं खुद, निप्पल नोच रही। अचानक अजय भैया ने मुझे उल्टा किया – डॉगी स्टाइल। गांड ऊपर, चूत खुली। “अब गांड भी चोदूंगा, लेकिन पहले चूत को पूरा लंड दूंगा।” धक्का मारा, गांड पर थप्पड़ – चटाक-चटाक। राहुल नीचे लेट गया, अपना लंड मेरी चूचियों के बीच रगड़ने लगा। टिट फक। “भाभी, तेरी चूचियां मस्त हैं… दूध निकाल दूंगा।”
फिर वो डबल अटैक। अजय भैया चूत में, राहुल ने गांड के छेद पर थूक लगाया और धीरे से घुसा दिया। आह्ह्ह! गांड फटने लगी। दो लंड एक साथ – चूत और गांड भरी हुई। धड़-धड़, चप-चप। मैं चीख रही थी – “मार डालोगे… ओह्ह… हां… चोदो दोनों… रंडी बना दो मुझे… फाड़ो…” वे हंस रहे थे, गालियां दे रहे – “साली बहू, घर की रंडी बनी… भैया सो रहा है, तू चुद रही है।” मेरी चूत से रस बह रहा, खून मिक्स, गांड जल रही। लेकिन ऑर्गेज़्म की लहर आ रही थी। अजय भैया ने स्पीड बढ़ाई – “झड़ रहा हूं… ले मेरे रस…” गर्म वीर्य चूत में भर गया, ओवरफ्लो हो गया। राहुल ने गांड में झाड़ा। मैं भी फटी – “आआआह्ह्ह… मर गई… चूत… गांड… सब फट गया…” शरीर कांप रहा, आंसू बह रहे, लेकिन मुस्कान थी।
उस रात के बाद, चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया। चौथे दिन, सुबह-सुबह बाथरूम में। मैं नहा रही थी, साबुन लगाया। राहुल घुस आया, नंगा। “भाभी, स्नान में मज़ा आएगा।” उसने मेरी पीठ पर साबुन लगाया, लेकिन हाथ चूत पर। उंगली डाली, घुमाई। फिर लंड घुसाया – दीवार से सटाकर। पानी बह रहा, धक्के मार रहा। “आह राहुल… कोई सुन लेगा…” लेकिन वो चोदता रहा। पांचवें दिन, लिविंग रूम में। सासुजी बाज़ार गईं, पति ऑफिस। अजय भैया ने सोफे पर लिटाया, चूत चाटी आधा घंटा। जीभ अंदर-बाहर। फिर चोदा – मिशनरी, डॉगी, सब। “दिव्या, तू हमारी प्राइवेट रंडी है।” छठे दिन, किचन में फिर। राहुल ने पीछे से घुसाया, जबकि मैं रोटी बेल रही थी। अजय भैया मुंह में। डबल ब्लोजॉब जैसा।
सातवें दिन, क्लाइमेक्स। रात को, पति सोया। भाई कमरे में आए। इस बार तेल लगाया – मालिश। मेरी पूरी बॉडी मसली। चूचियां, कमर, गांड, चूत। फिर तीनों पोज़ – पहले अजय भैया चूत में, राहुल मुंह में। फिर स्विच। आखिर में, मैं ऊपर – काउगर्ल। अजय भैया के लंड पर उछल रही, राहुल पीछे से गांड में। “चोदो… हां… मैं तुम्हारी गुलाम… रंडी…” वे झड़े, मैं झड़ी। वीर्य हर छेद में।
अब मेरी चूत कुंवारी नहीं, चुद चुकी रंडी की हो गई। पति नामर्द सोता रहता, भाई चोदते। मज़ा आ रहा है। पापा ने सोचा अच्छा दूल्हा लाया, लेकिन मैं तो भाइयों की हो गई। दोस्तों, कैसी लगी मेरी स्टोरी? कमेंट करो, शेयर करो। Nonvegstory.com पर ऐसी ही और पढ़ो। किसने मुठ मारी? 😈