नमस्ते दोस्तों, मैं हूँ राजेश। उम्र ५० साल की, लेकिन कोई देखे तो कहे – ये तो ३०-३२ का जवान लड़का है। चेहरा तेज, बॉडी फिट, बाल काले घने, दाढ़ी स्टाइलिश। रोज जिम जाता हूँ, अच्छा खाता-पीता हूँ, स्किन केयर करता हूँ। नोएडा में रहता हूँ, अच्छी IT जॉब, अच्छी कमाई। ३ BHK लग्जरी फ्लैट, नई SUV कार, लाइफस्टाइल टॉप क्लास।
मेरी दूसरी शादी हुई है। पहली वाली से तलाक हो गया था। अब बीवी है रिंकी – सिर्फ २५ साल की। गाँव की बहुत सुंदर लड़की, पहले विधवा हो गई थी। गोरी-चिट्टी, लंबे काले बाल, ३४-२६-३६ का परफेक्ट फिगर, होंठ गुलाबी, आँखें ऐसी कि बस देखते रह जाओ। शादी के बाद वो और उसकी माँ दोनों मेरे साथ नोएडा आ गईं। क्योंकि रिंकी की माँ सुनिता की सिर्फ एक ही बेटी है, और उनके पति को आठ साल पहले एक्सीडेंट में खो दिया था। सुनिता विधवा हैं, उम्र ४५ साल।
सुनिता जी भी कम आकर्षक नहीं। थोड़ी भराव वाली बॉडी, बड़े-भारी स्तन, गोल-मटोल कूल्हे, कमर में हल्की चर्बी जो उन्हें और ज्यादा सेक्सी बनाती है। चेहरा गोरा, होंठ मोटे-रसीले, मुस्कान में वो जादू जो आदमी को दीवाना कर दे।
शुरुआत में सब सामान्य था। रिंकी सुबह ऑफिस जाती, शाम को थककर लौटती। मैं और सुनिता जी घर पर रहते। पहले तो बस बातें होतीं – चाय बनाना, खाना बनाना, हल्की-फुल्की हँसी-मजाक। लेकिन धीरे-धीरे माहौल बदलने लगा।
एक दिन रिंकी ऑफिस गई हुई थी। मैं लिविंग रूम में सोफे पर लेटा टीवी देख रहा था। सुनिता जी किचन से आईं – लाल साड़ी में, ब्लाउज बहुत टाइट, स्तन उभरे हुए। वो मेरे पास आईं और बोलीं –
“दामाद जी… कमर में बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ी मालिश कर देंगे?”
मैंने मुस्कुराकर कहा – “अरे सासू माँ, मैं तो मालिश में उस्ताद हूँ। लेट जाइए।”
वो सोफे पर पेट के बल लेट गईं। मैंने पैरों से मालिश शुरू की। धीरे-धीरे जाँघों तक पहुँचा। साड़ी सरक गई। उनकी जाँघें गोरी, मोटी, मुलायम। मैंने हल्के से दबाया। वो सिसकारी ली – “आह… कितना अच्छा लग रहा है…”
मेरा हाथ और ऊपर गया। जाँघों के बीच तक। उनकी साँसें तेज। मैंने देखा – पैंटी गीली हो रही थी। अब ये सिर्फ मालिश नहीं रही थी।
मैंने उनके कान में फुसफुसाया – “सुनिता जी… आप कितनी खूबसूरत और सेक्सी हैं।”
वो थोड़ी शरमाईं लेकिन बोलीं – “दामाद जी… रिंकी को पता नहीं चलना चाहिए…”
मैंने उनकी साड़ी ऊपर की। ब्लाउज के हुक खोले। ब्रा से बाहर आए बड़े-बड़े स्तन। गुलाबी निप्पल्स सख्त। मैंने एक को मुंह में लिया, जोर से चूसने लगा। वो कराह रही थीं – “ओह्ह… राजेश… आठ साल हो गए… कोई नहीं छुआ मुझे…”
मैंने पैंटी उतारी। चूत पर हल्के-हल्के बाल, गीली-चिपचिपी। दो उँगलियाँ अंदर डालीं। वो चीखी – “आह्ह… और अंदर… जोर से…”
मेरा लंड फटने को था। पैंट उतारी। ७ इंच लंबा, मोटा। सुनिता जी ने देखा तो आँखें फैल गईं – “इतना बड़ा… रिंकी कैसे ले लेती है?”
मैंने हँसकर कहा – “वो तो रोज लेती है… अब आपकी बारी है सासू माँ।”
मैंने उन्हें लिटाया, पैर फैलाए। लंड चूत पर रखा। धीरे से धक्का। अंदर चला गया। वो जोर से कराही – “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना मत… चोदो मुझे…”
मैंने स्पीड बढ़ाई। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उनकी चूत टाइट लेकिन गीली, अच्छे से ले रही थी। वो चिल्ला रही थीं – “मारो… जोर से… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… चोदो अपनी सास को…”
मैंने २० मिनट तक पेला। फिर बोला – “सासू माँ… आने वाला हूँ…”
वो बोलीं – “अंदर ही डाल दो… आठ साल से सूखी हूँ… भर दो मुझे…”
मैंने जोर का धक्का मारा और अंदर झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उनकी चूत में भर गया। वो भी झड़ गईं, पूरा शरीर काँप गया। दोनों थककर लेट गए।
उस दिन से रोज का सिलसिला। रिंकी ऑफिस जाती, हम दिन भर चुदाई करते। कभी किचन में खड़े-खड़े, कभी बेडरूम में, कभी बालकनी में। सुनिता जी कहतीं – “रिंकी से ज्यादा मजा आ रहा है तुम्हारे साथ… वो बच्ची है, मैं तो पूरी औरत हूँ।”
रात को रिंकी लौटती। मैं उसे भी पूरा चोदता। उसे डॉगी स्टाइल बहुत पसंद। मैं पीछे से पकड़ता, बाल खींचता, जोर-जोर से ठोकता। वो चिल्लाती – “पति जी… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… मैं तुम्हारी हूँ…”
कभी रिंकी थककर सो जाती। तब मैं चुपके सुनिता जी के कमरे में जाता। रात के १-२ बजे। वो नंगी इंतजार करती। मैं अंदर जाता, ऊपर चढ़ जाता। धीरे-धीरे चोदता ताकि आवाज न जाए। लेकिन वो कंट्रोल नहीं कर पातीं – “आह… दामाद जी… धीरे… लेकिन गहरा… मत रुकना…”
एक दिन रिंकी को शक हो गया। शाम को घर लौटी तो सीधे मेरे पास आई। हाथ कमर पर, आँखों में शरारत। बोली –
“पापा? पापा गलत है ना… मैं तो रिंकी हूँ, तुम्हारी पत्नी हूँ। पति जी कहो ना!”
मैं हक्का-बक्का। वो मुस्कुराई – “मुझे सब पता है पति जी… तुम और मम्मी… दिन भर क्या करते हो। मैंने देख लिया था कल रात। तुम मम्मी के कमरे में गए थे। कितना जोश था दोनों में!”
मैं चुप। वो आगे आई, मेरी छाती पर हाथ रखा – “शुरू में जलन हुई, लेकिन फिर… देखकर गर्म हो गई। सोचा क्यों ना मैं भी शामिल हो जाऊँ?”
मैंने पूछा – “तुम्हें बुरा नहीं लगा?”
वो हँसी – “बुरा क्यों? मम्मी अकेली हैं सालों से। और तुम हमारे दोनों के हो। फैमिली में सब शेयर होता है ना?”
उस रात डिनर के बाद हम तीनों लिविंग रूम में बैठे। रिंकी ने बात शुरू की –
“मम्मी… अब छुपाने की जरूरत नहीं। मुझे सब पता है। और मैं खुश हूँ।”
सुनिता जी शरमा गईं – “बेटा… मैं… सॉरी…”
रिंकी ने कहा – “सॉरी की क्या बात? अब से हम तीनों साथ। कोई छुपाना नहीं।”
रिंकी ने मेरी तरफ देखा – “पति जी… आज से हम तीनों एक बेड पर।”
उस रात हम तीनों बेडरूम में। रिंकी और सुनिता जी दोनों ने मेरे कपड़े उतारे। दोनों ने मिलकर मेरा लंड चूसा। रिंकी नीचे से गोलियाँ चाट रही थी, सुनिता जी ऊपर से लंड मुंह में ले रही थीं। मैं पागल हो गया।
फिर मैंने रिंकी को लिटाया, चोदना शुरू किया। सुनिता जी अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी। मैं दोनों को एक साथ संतुष्ट कर रहा था। रिंकी चिल्लाई – “पति जी… मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह…”
सुनिता जी भी – “मैं भी… दामाद जी… और जोर से चाटो…”
फिर मैंने दोनों के मुंह में झड़ दिया। दोनों ने मिलकर सारा वीर्य चाट-पिया।
अब जिंदगी स्वर्ग है। दिन में सुनिता जी मेरी बीवी बनती हैं – खुलकर चुदाई, कोई शर्म नहीं। रात में रिंकी। कभी-कभी तीनों साथ बेड पर घंटों। मैं ५० का हूँ, लेकिन दो सबसे खूबसूरत औरतें मेरी – एक २५ की जवान हॉट बीवी, एक ४५ की成熟 और भूखी सास। दोनों की चुदाई करता हूँ, दोनों मुझे पागल कर देती हैं। क्या कमाल की जिंदगी है!