शराब का नशा और अनकही आग – गाँव की सर्द रात थी। आसमान में बादल छाए थे, और हवा में ठंडक थी। रामलाल अपने छोटे से घर के आँगन में बैठा था, एक पुरानी बोतल से देसी शराब के घूँट ले रहा था। उसकी पत्नी कई साल पहले गुज़र चुकी थी, और अब वह अपनी 22 साल की बेटी, रेखा, के साथ अकेला रहता था। शराब का नशा धीरे-धीरे उसके दिमाग पर चढ़ रहा था, और उसकी आँखें भारी हो रही थीं। रामलाल 45 का था, लेकिन उसका जिस्म अभी भी मज़बूत था—चौड़ी छाती, मज़बूत बाजुएँ, और एक देहाती मर्दानगी।
रेखा उस रात अपने कमरे में थी। उसने अपने दोस्तों के साथ गाँव के मेले में थोड़ी शराब पी ली थी, जो उसके लिए नई बात थी। उसका चेहरा लाल हो गया था, और उसका जिस्म गर्म हो रहा था। उसकी टाइट कुर्ती उसके भरे हुए जिस्म को उभार रही थी—उसकी चूचियाँ सख्त और गोल, उसकी गांड मादक। शराब का नशा उसके दिमाग पर हावी हो गया था, और उसकी सोच धुंधली हो रही थी। वह अपने कमरे से निकली, और आँगन में अपने बाप को देखा।
“बापू, आप अभी तक जाग रहे हो?” रेखा ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक नशीली मिठास थी। वह थोड़ा लड़खड़ा रही थी, और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। रामलाल ने उसकी ओर देखा, और शराब के नशे में उसकी नज़र रेखा के जिस्म पर टिक गई। उसकी कुर्ती का गला थोड़ा खुला था, और उसकी चूचियों की झलक साफ़ दिख रही थी। “रेखा, तू पीके आई है?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ में गुस्सा और हैरानी थी।
रेखा हँसी, और पास आकर रामलाल के बगल में बैठ गई। “हाँ, बापू। थोड़ी सी मज़े के लिए,” उसने कहा, और अपना हाथ रामलाल के कंधे पर रख दिया। शराब का नशा दोनों को अपनी गिरफ्त में ले रहा था। रेखा की उंगलियाँ रामलाल की गर्दन पर फिसलीं, और उसकी साँसें तेज़ हो गईं। “आप भी तो पी रहे हो ना,” उसने फुसफुसाया, और अपने होंठ रामलाल के कान के पास ले गई।
रामलाल का जिस्म सिहर उठा। उसने रेखा को दूर करने की कोशिश की, लेकिन उसका हाथ कमज़ोर पड़ गया। “रेखा, ये क्या कर रही है? मैं तेरा बाप हूँ,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में दृढ़ता नहीं थी। शराब ने उसके होश छीन लिए थे, और रेखा की गर्म साँसें उसके जिस्म में आग लगा रही थीं। रेखा ने अपने होंठ चाटे, और बोली, “बापू, आज रात कोई नियम नहीं। बस हम हैं, और ये नशा।”
इससे पहले कि रामलाल कुछ कह पाता, रेखा उसके ऊपर चढ़ गई। उसने अपने घुटनों से रामलाल की कमर को दबाया, और उसकी कुर्ती के बटन खोलने लगी। उसकी चूचियाँ बाहर निकल आईं, और रामलाल की नज़र उन पर ठहर गई। “रेखा, मत कर,” उसने कहा, लेकिन उसकी आँखें कुछ और कह रही थीं। रेखा ने रामलाल के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, और एक गहरी, गीली kiss शुरू कर दी। उसकी जीभ रामलाल के मुँह में घुसी, और दोनों के जिस्म एक-दूसरे से चिपक गए।
रामलाल का विरोध टूट गया। शराब का नशा और रेखा की मादक छुअन ने उसे जंगली बना दिया। उसने रेखा की कमर पकड़ ली, और उसे और पास खींचा। “तेरी चूचियाँ… तेरी ये गर्मी… मुझे मार डालेगी,” उसने कराहते हुए कहा, और रेखा की चूचियों को ज़ोर से दबाया। रेखा की सिसकी निकल गई, और उसने रामलाल की बनियान फाड़ दी। उसकी नंगी छाती पर उसने अपने नाखून गड़ाए, और बोली, “बापू, मेरी चूत में आग लग रही है।”
रेखा ने अपनी सलवार उतार दी, और उसकी गीली चूत रामलाल के सामने थी। उसने रामलाल की पैंट खोली, और उसका सख्त लंड बाहर निकाला। “ये कितना मोटा है,” उसने फुसफुसाया, और उसे अपने हाथों में रगड़ा। रामलाल की साँसें उखड़ गईं। उसने रेखा को ज़मीन पर लिटाया, और उसकी टाँगें चौड़ी कर दीं। “तूने ये आग लगाई है, अब मैं इसे बुझाऊँगा,” उसने कहा, और अपना लंड रेखा की चूत पर रगड़ा।
रेखा ने अपनी गांड उठाई, और बोली, “चोदो मुझे, बापू।” रामलाल ने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और उसकी चूत में घुस गया। रेखा की चीख आँगन में गूँज उठी, लेकिन शराब के नशे में दोनों को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। रामलाल ने उसे रगड़-रगड़कर चोदना शुरू किया। उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं, और उसकी गांड ज़मीन पर रगड़ खा रही थी। “तेरी चूत कितनी टाइट है,” रामलाल ने कहा, और उसकी चूचियों को मसलते हुए उसे चोदा।
रेखा ने रामलाल को पलटा, और उसके ऊपर चढ़ गई। “अब मेरी बारी,” उसने कहा, और उसका लंड अपनी चूत में लिया। वह ऊपर-नीचे होने लगी, उसकी चूचियाँ रामलाल के मुँह के सामने हिल रही थीं। रामलाल ने उन्हें चूसा, और रेखा की गांड पर थप्पड़ मारा। “तेरी गांड मुझे पागल कर देती है,” उसने कहा। रेखा की सिसकियाँ तेज़ हो गईं। “चोदो… और ज़ोर से,” उसने कराहते हुए कहा।
कई मिनटों तक ये सिलसिला चला। दोनों के जिस्म पसीने और नशे में डूब गए थे। आखिर में, रामलाल ने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और रेखा के अंदर झड़ गया। रेखा भी उसी पल स्खलित हो गई, और उसके जिस्म में एक सिहरन दौड़ गई। वह रामलाल के सीने पर गिर पड़ी, उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। “बापू, ये नशा कभी नहीं उतरेगा,” उसने फुसफुसाया। रामलाल चुप रहा, लेकिन उसकी आँखों में पछतावा और जुनून दोनों थे।
सुबह होने तक दोनों वहीँ पड़े रहे। शराब का नशा उतर चुका था, लेकिन जो हुआ, वो उनकी ज़िंदगी बदल गया था।