बरसात में सुलगता जिस्म
मानसून की बारिश गाँव को भिगो रही थी, और राधा अपने कमरे में अकेली थी। उसकी पतली साड़ी उसके गीले जिस्म से चिपक गई थी, उसकी चूचियाँ साड़ी के नीचे साफ़ उभर रही थीं। उसका मन अर्जुन के लिए तड़प रहा था—वो मर्द, जिसके होंठों की गर्मी और हाथों की छुअन उसे रातों में नींद … पूरी कहानी पढ़िए