Maid Sex Story – Wife Husband and Maid : प्रिया की डायरी: मेरा पति, मैं और मेड
दिनांक: 15 नवंबर 2025, रात 10 बजे
आज की रात मेरे लिए कुछ अलग थी। मैं, प्रिया, 29 साल की हॉट और गोरी औरत, अपने बेडरूम में थी। दिल्ली की सर्दी शुरू हो चुकी थी, और मैंने काले रंग की सिल्क नाइटी पहनी थी। मेरी चूचियाँ, जो बड़ी, गोल और रसीली हैं, उस टाइट नाइटी में से उभर रही थीं। मेरे निप्पल सख्त होकर सिल्क पर निशान बना रहे थे। मेरी कमर पतली है, और मेरी गाँड मोटी, नरम और गोल है, जो चलते वक्त लचकती है। मेरी जाँघें मोटी और चिकनी हैं, और मेरी चूत हमेशा मेरे पति रोहित के लंड की भूखी रहती है। रोहित, 32 साल का जवान और ताकतवर मर्द, बेड पर लेटा था। उसकी पैंट में उसका 8 इंच का मोटा, काला लंड सख्त होकर तंबू बना रहा था। उसकी टोपी गीली थी, और उसकी नसें उभरी हुई थीं, जैसे कोई जानवर जो चूत फाड़ने को तैयार हो।
“प्रिया, आज तेरी चूत में आग लगाऊँगा,” उसने अपनी गहरी आवाज़ में कहा और मुझे अपनी ओर खींच लिया। उसका हाथ मेरी नाइटी पर फिसला, और उसने उसे ऊपर उठा दिया। मेरी चूचियाँ नंगी हो गईं। मेरे निप्पल गुलाबी और सख्त थे, और ठंड में और उभर गए थे। “रोहित, चूसो ना मेरी चूचियाँ,” मैंने तड़पते हुए कहा। उसने मेरी एक चूची अपने मुँह में ले ली। उसकी गर्म जीभ मेरे निप्पल पर फिसली, और वो उसे चूसने लगा। उसका दूसरा हाथ मेरी दूसरी चूची को जोर-जोर से मसल रहा था। “आह्ह… रोहित… कितना मज़ा आ रहा है,” मैं सिसक रही थी। उसकी उंगलियाँ मेरे निप्पल को नोच रही थीं, और मेरी चूत गीली हो गई थी। उसने मेरी नाइटी पूरी उतार दी। मेरी चूत नंगी हो गई। मेरी हल्की झाँटें पसीने से चिपक गई थीं, और मेरी फाँकें गीली होकर चमक रही थीं। “प्रिया, तेरी चूत तो पहले से तरस रही है,” उसने हँसते हुए कहा और अपनी मोटी उंगली मेरी चूत में डाल दी। “आह्ह… रोहित… और डालो,” मैं चीख पड़ी। उसकी उंगली मेरी चूत को चोद रही थी, और मेरा पानी उसकी उंगली पर बह रहा था।
रात 10:30 बजे
तभी बेडरूम का दरवाज़ा खुला। मैं चौंक गई। सुनीता, हमारी मेड, अंदर आई। वो 24 साल की साँवली, मस्त और भरे हुए जिस्म वाली लड़की है। उसकी चूचियाँ मध्यम लेकिन सख्त हैं, जैसे दो नारियल, जो उसकी पुरानी साड़ी में उभरे रहते हैं। उसकी गाँड गोल और टाइट है, और उसकी जाँघें मोटी और चिकनी हैं। उसकी चूत की गर्मी उसकी साड़ी से भी महसूस होती थी। “साहब, चाय लाई हूँ,” वो बोली और हमें देखकर रुक गई। मेरी चूचियाँ नंगी थीं, और रोहित का हाथ मेरी चूत में था। मैं शरम से मर गई, लेकिन रोहित ने मुझे चुप कराया। “सुनीता, यहाँ आ,” उसने उसे बुलाया। सुनीता शरमाते हुए पास आई। “प्रिया, आज तुम दोनों की चूत चोदूँगा,” रोहित ने मेरे कान में फुसफुसाया। मैं हैरान थी, लेकिन मेरी चूत में आग लगी थी, और मैं चुप रही।
रोहित ने सुनीता की साड़ी खींच दी। उसकी चूचियाँ नंगी हो गईं। वो सख्त और मस्त थीं, और उसके निप्पल काले और सख्त थे। “सुनीता, तेरी चूचियाँ भी मस्त हैं,” रोहित ने कहा और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। “साहब… आह्ह…” सुनीता सिसक रही थी। उसने सुनीता की साड़ी पूरी उतार दी। सुनीता की चूत नंगी हो गई। उसकी घनी झाँटें गीली थीं, और उसकी फाँकें चमक रही थीं। “सुनीता, तेरी चूत भी भूखी है,” रोहित ने कहा और उसकी चूत में उंगली डाल दी। “आह्ह… साहब…” सुनीता चीख पड़ी।
रात 11 बजे
रोहित ने अपनी पैंट उतारी। उसका 8 इंच का लंड सख्त और मोटा था। उसकी टोपी से पानी टपक रहा था। उसने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी टाँगें चौड़ी कर दीं। मेरी चूत पूरी खुल गई। मेरी जाँघें मोटी और गोरी थीं, और मेरी गाँड बेड पर फैल गई थी। “प्रिया, ले मेरा लंड,” उसने कहा और मेरी चूत में लंड पेल दिया। “आह्ह… रोहित… चोदो मुझे,” मैं चीखी। उसका लंड मेरी चूत को चीर रहा था। वो मेरी चूचियाँ दबाते हुए मुझे चोदने लगा। “प्रिया, तेरी चूत कितनी टाइट है,” वो बोला। हर धक्के से मेरी गाँड उछल रही थी, और मेरी चूचियाँ हवा में हिल रही थीं। “रोहित, और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो,” मैं चिल्ला रही थी। मेरी चूत गीली होकर लाल हो गई थी, और मेरा पानी उसके लंड पर चिपक रहा था।
फिर उसने सुनीता को मेरे बगल में लिटाया। “सुनीता, अब तेरी बारी,” उसने कहा। सुनीता की टाँगें चौड़ी कीं। उसकी चूत घनी झाँटों से ढकी थी, लेकिन उसकी फाँकें गीली और लाल थीं। रोहित ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और सुनीता की चूत में डाल दिया। “आह्ह… साहब… फाड़ दो,” सुनीता चिल्लाई। उसका लंड सुनीता की चूत को चोद रहा था। “सुनीता, तेरी चूत भी मस्त है,” वो बोला। वो सुनीता की चूचियाँ मसल रहा था, और सुनीता की सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “साहब, और जोर से… मेरी चूत में आग लगी है,” सुनीता चीख रही थी।
रात 11:45 बजे
रोहित ने हमें बारी-बारी चोदा। पहले मेरी चूत में लंड डाला, फिर सुनीता की चूत में। “प्रिया, सुनीता, तुम दोनों की चूत मेरा लंड चूस रही हैं,” उसने कहा। उसका लंड मेरी चूत में गहराई तक जा रहा था, और मेरी चूचियाँ उसके हाथों में मसल रही थीं। “रोहित, मेरी गाँड भी मारो,” मैंने तड़पते हुए कहा। उसने मुझे पलटा। मेरी गाँड गोल और नरम थी। उसने मेरी गाँड पर थूक दिया और अपना लंड मेरी गाँड के छेद पर रखा। “प्रिया, तेरी गाँड फाड़ूँगा,” उसने कहा और एक जोरदार धक्का मारा। “आह्ह… रोहित… फट गई… आह्ह…” मैं रो पड़ी। उसका लंड मेरी गाँड को चीर रहा था। “प्रिया, तेरी गाँड टाइट है,” वो बोला और मेरी चूचियाँ पीछे से मसलने लगा।
फिर उसने सुनीता को पलटा। “सुनीता, तेरी गाँड भी चोदूँगा,” उसने कहा। सुनीता की गाँड गोल और टाइट थी। उसने सुनीता की गाँड में लंड पेल दिया। “आह्ह… साहब… मर गई,” सुनीता चीखी। “सुनीता, तेरी गाँड मज़ा दे रही है,” वो बोला। वो सुनीता की गाँड चोद रहा था, और उसकी चूचियाँ हवा में लटक रही थीं। “साहब, और जोर से… मेरी गाँड फाड़ दो,” सुनीता चिल्ला रही थी।
रात 12:30 बजे
रोहित ने हमें दोनों को एक साथ चोदने का फैसला किया। उसने मुझे अपने ऊपर बिठाया। “प्रिया, मेरे लंड पर बैठ,” उसने कहा। मैं उसके लंड पर बैठ गई। उसका लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया। “आह्ह… रोहित… कितना गहरा जा रहा है,” मैं सिसक रही थी। वो मेरी चूचियाँ चूस रहा था, और मैं उसके लंड पर उछल रही थी। फिर उसने सुनीता को अपने मुँह पर बिठाया। “सुनीता, अपनी चूत मेरे मुँह पर रख,” उसने कहा। सुनीता की चूत रोहित के मुँह पर थी, और वो उसकी चूत चाट रहा था। “साहब… आह्ह… चाटो,” सुनीता चीख रही थी। मैं रोहित के लंड पर कूद रही थी, और सुनीता उसकी जीभ से चुद रही थी।
फिर उसने हमें पोज़ीशन बदली। “प्रिया, अब तेरी गाँड में डालूँगा, और सुनीता की चूत चोदूँगा,” उसने कहा। उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गाँड में लंड डाला। “आह्ह… रोहित… फाड़ दो,” मैं चिल्लाई। वो मेरी गाँड चोद रहा था, और उसकी उंगलियाँ सुनीता की चूत में थीं। “सुनीता, तेरी चूत गीली है,” वो बोला। फिर उसने सुनीता को नीचे लिटाया और उसकी चूत में लंड पेल दिया। “साहब, मेरी चूत फाड़ दो,” सुनीता चीखी। वो सुनीता को चोद रहा था, और मैं उसकी गोटियाँ चाट रही थी।
रात 1:30 बजे
रोहित का जोश चरम पर था। “प्रिया, सुनीता, तुम दोनों मेरे लंड को चूसो,” उसने कहा। मैंने उसका लंड मुँह में लिया। उसका मोटा लंड मेरे गले तक जा रहा था। “प्रिया, चूस साली,” वो बोला। सुनीता उसकी गोटियाँ चूस रही थी। “सुनीता, मेरी गोटियाँ चाट,” वो चिल्लाया। उसका लंड मेरे मुँह में सख्त हो रहा था। फिर उसने हमें फिर से चोदा। मेरी चूत में लंड डाला, फिर सुनीता की गाँड में। “प्रिया, सुनीता, तुम दोनों की चूत और गाँड मस्त हैं,” वो बोला। उसने हमें इतना चोदा कि हमारी चूत और गाँड सूज गईं।
सुबह 3 बजे
रोहित का लंड अभी भी सख्त था। “प्रिया, सुनीता, अब झड़ूँगा,” उसने कहा। उसने अपना लंड मेरी चूत में डाला और इतने जोर से चोदा कि मेरा पानी छूट गया। “रोहित, मैं गई… आह्ह…” मैं चीखी। फिर उसने सुनीता की चूत में लंड डाला। “सुनीता, ले मेरा माल,” वो बोला और सुनीता की चूत में झड़ गया। उसका गर्म माल मेरी चूत और सुनीता की चूत से बह रहा था। “रोहित, तुम मस्त चोदते हो,” मैंने कहा। उसने हमारी चूचियाँ चूसीं और बोला, “प्रिया, सुनीता, तुम दोनों मेरी रंडियाँ हो। अब रोज़ चुदाई होगी।”
सुबह 6 बजे
सुबह हम तीनों नंगे बेड पर पड़े थे। मेरी चूत और गाँड में दर्द था, लेकिन मज़ा भी आया। सुनीता की चूचियाँ लाल थीं, और उसकी चूत से रोहित का माल टपक रहा था। “रोहित, ये रोज़ करो,” मैंने कहा। वो हँसा और बोला, “प्रिया, जब चूत गर्म होगी, मेरा लंड तैयार रहेगा।”