हाय दोस्तों, मैं हूं सरिता, उम्र 42 साल, दिल्ली के एक मिडिल क्लास मोहल्ले में रहती हूं। मेरे पति राजेश सरकारी नौकरी में हैं, लेकिन पिछले 5-6 साल से उनका लंड ठीक से खड़ा नहीं होता। डॉक्टर कहते हैं इरेक्टाइल डिसफंक्शन, लेकिन मैं क्या करूं? मेरी चूत तो अभी भी जवान है, 38-34-40 की फिगर, गोरी चिकनी स्किन, भारी-भरकम चूचियां और वो रसीली चूत जो रात भर तरसती रहती है। मैं Nonvegstory.com पर रोज़ रात को आती हूं, चुदाई वाली स्टोरीज़ पढ़ती हूं – माँ-बेटे की, भाभी-देवर की, सब। पढ़कर उंगली डालती हूं, लेकिन असली मजा कहां? और फिर मेरी जिंदगी में वो दिन आया जब मेरा अपना बेटा रोहन मुझे वो खुशी देने लगा जो मेरे पति नहीं दे पाते।
रोहन मेरे बड़ा बेटा है, 21 साल का, कॉलेज में पढ़ता है। लंबा, गोरा, जिम जाता है, छाती चौड़ी, और वो लंड… उफ्फ, पहली बार देखा था तो आंखें फटी रह गईं। 8 इंच से ज्यादा, मोटा, काला सिरा, नसें फूली हुईं। वो घर में अक्सर हाफ पैंट में घूमता है, और उसका उभार साफ दिखता है। मैं सोचती, काश ये मेरा होता। लेकिन कभी सोचा नहीं था कि ये कल्पना सच हो जाएगी।
शुरुआत तब हुई जब पिछले साल पति दिल्ली से बाहर ट्रेनिंग पर गए थे। 15 दिन का टूर। घर में सिर्फ मैं, रोहन और छोटी बेटी (जो हॉस्टल में थी)। रात को मैं अकेली सोती, चूत में खुजली। एक रात मैंने Nonvegstory.com पर माँ-बेटे वाली स्टोरी पढ़ी – बेटा माँ को चोदता है, रात भर। पढ़ते-पढ़ते मेरी चूत गीली हो गई। उंगली डालकर रगड़ रही थी, कराह रही थी। अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला। रोहन खड़ा था। “माँ, क्या हुआ? तुम्हारी आवाज़ आ रही थी।” मैं घबरा गई, चादर से ढक लिया। लेकिन रोहन अंदर आ गया, बेड पर बैठ गया। “माँ, तुम ठीक हो? मैंने देखा तुम… हाथ नीचे कर रही थीं।” उसकी आंखों में शरारत थी।
मैं शरमा गई, लेकिन चूत की प्यास ने हिम्मत दी। “बेटा, तेरी माँ भी इंसान है। पापा तो नामर्द हो गए हैं।” रोहन ने मेरी तरफ देखा, फिर मुस्कुराया। “माँ, मैं हूं ना। मैं तुम्हें खुश कर सकता हूं।” कहते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी हाफ पैंट पर रख दिया। यार, वो लंड… पैंट के ऊपर से ही सख्त और गरम। मैंने दबाया। “रोहन… ये… गलत है ना?” लेकिन वो बोला, “माँ, प्यार में कुछ गलत नहीं। मैं तुम्हें रात भर चोदूंगा, जैसा तुम चाहती हो।”
वो मुझे चूमने लगा। होंठों पर, गले पर। मैं पिघल गई। उसने मेरी नाइटि ऊपर की, ब्रा खोल दी। मेरी चूचियां बाहर आ गईं – भारी, निप्पल सख्त। रोहन ने एक चूची मुंह में लिया, चूसने लगा। “माँ… तेरी चूचियां कितनी रसीली हैं… दूध निकाल लूं?” मैं कराह दी, “हां बेटा… चूस… जोर से…” वो दूसरी चूची दबा रहा था, निप्पल काट रहा था। नीचे उसने अपना हाथ मेरी पैंटी पर रखा। गीली थी मैं। “माँ, तेरी चूत तो टपक रही है।” उसने पैंटी उतारी, टांगें फैलाईं। उसकी जीभ चूत पर लगी। लिज लिज चाटने लगा। क्लिट पर जीभ घुमाई। मैं चीखी, “आह… रोहन… चाट… अपनी माँ की चूत चाट… कितना मजा आ रहा…” वो जीभ अंदर डाल रहा था, रस पी रहा था। 15 मिनट चाटा, मैं झड़ गई। “बेटा… आ गया… माँ झड़ रही…”
अब रोहन ने अपना शॉर्ट्स उतारा। लंड बाहर – बड़ा, सख्त, सिरा चमकदार। “माँ, देख… ये तेरे लिए है।” मैंने हाथ में लिया, सहलाया। “वाह बेटा… कितना मोटा… माँ की चूत फाड़ देगा।” मैंने मुंह में लिया। चूसने लगी। जीभ से सिरा चाटा, गले तक लिया। रोहन सिसकारा, “माँ… साली रंडी माँ… कितना अच्छा चूस रही है… चूस… पूरा लंड चूस।” मैं चूसती रही, लंड चाटती रही। वो मेरे बाल पकड़कर मुंह में धक्के मार रहा था।
फिर रोहन ने मुझे लिटाया। टांगें कंधों पर रखीं। लंड चूत पर रगड़ा। “माँ, तैयार? अब तेरी चूत में मेरा लंड जाएगा।” मैं बोली, “हां बेटा… डाल… चोद अपनी माँ को।” एक जोरदार धक्का – आह्ह्ह! पूरा लंड अंदर। चूत फट गई लगी, लेकिन मजा दोगुना। “चोद बेटा… जोर से… माँ की चूत फाड़ दे…” वो धक्के मारने लगा – धड़-धड़। बेड हिल रहा था। “माँ… कितनी टाइट चूत है तेरी… साली गरम रंडी… रात भर चोदूंगा।” मैं चीख रही थी, “हां… चोद… अपनी माँ को रंडी बना… आह… उफ्फ…”
पोजिशन बदली। मैं ऊपर – काउगर्ल। रोहन के लंड पर उछल रही थी। चूचियां उछल रही थीं। वो नीचे से धक्के मार रहा था। “माँ… तेरी चूत कितनी गर्म… ले… पूरा लंड ले…” मैं तेज-तेज उछल रही थी। फिर डॉगी। मैं घुटनों पर, गांड ऊपर। रोहन ने पीछे से घुसाया। थप्पड़ मारे गांड पर – चटाक चटाक। “ले माँ… तेरी गांड भी मारूंगा एक दिन… लेकिन पहले चूत…” बाल खींचे, धक्के मारे। चूत से रस बह रहा था।
रात भर चुदाई होती रही। तीन बार झड़े हम। पहली बार चूत में, दूसरी बार मुंह में, तीसरी बार चूचियों पर। सुबह तक मैं थक गई, लेकिन खुश। रोहन बोला, “माँ, अब पापा जब भी बाहर जाएंगे, मैं रात भर तेरी चूत चोदूंगा।” मैंने किस किया, “हां बेटा… तेरी माँ अब तेरी रखैल है।”
अब हर मौके पर चुदाई। कभी किचन में पीछे से, कभी बाथरूम में, कभी छत पर। पति को शक नहीं, क्योंकि वो नामर्द है। रोहन मुझे रात भर खुश करता है – लंड से, जीभ से, हाथ से। मेरी चूत अब हमेशा उसकी है।
दोस्तों, कैसी लगी मेरी कहानी? क्या तुम भी ऐसी फैंटसी रखते हो? कमेंट में बताओ। Nonvegstory.com पर ऐसी और पढ़ो, लेकिन मेरी वाली सबसे हॉट है। 😈
Comments are closed.