मेरा नाम आरव है। उम्र २४ साल। मैं दिल्ली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मेरी दीदी का नाम है अनन्या। वो २८ साल की हैं। दीदी की शादी को चार साल हो चुके थे, लेकिन पिछले साल उनका तलाक हो गया। पति के साथ compatibility नहीं थी। उसके बाद से दीदी वापस घर आ गईं। मम्मी-पापा अब हमारे साथ नहीं रहे, इसलिए घर में सिर्फ मैं और दीदी रहते हैं।
दीदी हमेशा से मेरी सबसे अच्छी दोस्त रही हैं। बचपन में हम साथ खेलते, साथ सोते, एक-दूसरे के राज़ बताते। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े हुए, दीदी का बदन खिलने लगा। गोरी चिकनी त्वचा, लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते, भरी हुई ३६ साइज की चूचियाँ, पतली कमर और गोल-मटोल गांड। जब वो घर में शॉर्ट्स और टॉप में घूमतीं तो मेरा मन अजीब हो जाता। मैं खुद को कोसता, “ये दीदी है, आरव। गलत सोच भी मत।” लेकिन दिल नहीं मानता था।
तलाक के बाद दीदी काफी उदास रहने लगीं। वो अक्सर मेरे कमरे में आकर बैठ जातीं, सिर मेरे कंधे पर रख देतीं। “आरव, मुझे लगता है अब कोई मुझे प्यार नहीं करेगा,” वो कहतीं। मैं उन्हें गले लगाकर कहता, “दीदी, मैं हूँ ना।” लेकिन वो गले लगाना अब पहले जैसा नहीं रह गया था। उनके बदन की गर्माहट, उनकी खुशबू, उनके नरम स्तन मेरे सीने से सटना — सब कुछ मुझे उत्तेजित करने लगा।
एक रात बारिश बहुत तेज हो रही थी। लाइट चली गई। हम दोनों लिविंग रूम में मोमबत्ती जलाकर बैठे थे। दीदी ने हल्का सा नाइट सूट पहना हुआ था। उनका पल्ला सरका हुआ था, जिससे उनकी गोरी जाँघें दिख रही थीं।
“आरव, ठंड लग रही है,” दीदी ने कहा और मेरे पास सरक आईं। मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया। दीदी का सिर मेरे सीने पर था। उनकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं। मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा।
“दीदी… आप बहुत सुंदर हो,” मैंने अनजाने में कह दिया।
दीदी ने ऊपर देखा। उनकी आँखों में नमी थी। “आरव, तू मुझे सच में प्यार करता है न?”
“बहुत, दीदी।”
उस पल हमारी नजरें मिलीं। दीदी ने धीरे से अपना चेहरा ऊपर किया। हमारे होंठ करीब आए। पहला किस — हल्का, काँपता हुआ। दीदी ने आँखें बंद कर लीं। मैंने उन्हें और करीब खींच लिया। किस गहरा होता गया। दीदी की जीभ मेरी जीभ से मिली। हम दोनों की साँसें तेज हो गईं।
“आरव… ये गलत है… हम भाई-बहन हैं,” दीदी फुसफुसाईं, लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका।
“दीदी, आज सिर्फ हम हैं। कोई नहीं देख रहा। मैं आपको सालों से चाहता हूँ,” मैंने कहा और उनके होंठ फिर चूस लिए।
मैंने दीदी को उठाकर बेडरूम में ले गया। मोमबत्ती की हल्की रोशनी में दीदी और भी खूबसूरत लग रही थीं। मैंने उनके नाइट सूट का टॉप उतारा। उनकी चूचियाँ ब्रा में कैद थीं। मैंने ब्रा का हुक खोला। भारी, गोल, गुलाबी निप्पल्स वाली चूचियाँ बाहर आ गईं। मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा।
“आह… आरव… धीरे… कितने साल बाद किसी ने छुआ है…” दीदी सिसकार रही थीं।
मैंने उनकी दूसरी चूची दबाई, चूसी। दीदी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं। मैंने उनका नाइट सूट पूरी तरह उतार दिया। दीदी अब सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी पैंटी पर गीला धब्बा साफ दिख रहा था। मैंने पैंटी भी उतार दी। दीदी की चूत — साफ, गुलाबी, हल्के बालों वाली — मेरे सामने थी।
मैं घुटनों पर बैठ गया और दीदी की चूत चाटने लगा। मेरी जीभ उनकी क्लिट पर घूम रही थी। दीदी की कमर उठ रही थी। “आरव… आह… वहाँ… और चाटो… दीदी की चूत को चूसो…”
दीदी पहली बार झड़ गईं। उनका रस मेरे मुंह में आया। मैंने उसे चाट लिया।
अब दीदी ने मेरी शर्ट और पैंट उतारी। मेरा लंड पूरा सख्त होकर खड़ा था। दीदी ने उसे देखा और बोलीं, “वाह आरव… कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड।”
उन्होंने उसे हाथ में पकड़ा और सहलाने लगीं। फिर मुंह में ले लिया। दीदी बहुत अच्छा चूस रही थीं। गर्म, गीला मुंह। मैं उनके बाल पकड़कर उनके मुंह में धक्के मारने लगा।
“दीदी… आप बहुत अच्छी चूसती हो…”
फिर मैंने दीदी को बेड पर लिटाया। उनकी टाँगें फैलाईं। मेरा लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया।
“आह… आरव… धीरे… सालों बाद हो रहा है…” दीदी की आँखों में आँसू थे।
मैंने पूरा लंड धीरे-धीरे अंदर कर दिया। दीदी की चूत तंग और गर्म थी। मैं धक्के मारने लगा — पहले धीरे, फिर तेज। हर धक्के पर दीदी चीख रही थीं — “हाँ आरव… चोदो अपनी दीदी को… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…”
मैंने उनकी चूचियाँ दबाते हुए चोदा। फिर उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड डाला। “दीदी, आपकी गांड कितनी सॉफ्ट और गोल है।”
“हाँ… गांड भी मार ले… आज सब कुछ ले ले अपनी दीदी का…”
रात भर हम चोदते रहे। दीदी कई बार झड़ चुकी थीं। मैंने उनकी चूत में, मुंह में और चूचियों पर पानी छोड़ा। हर बार दीदी मुझे चूमतीं और कहतीं, “आरव, अब तू ही मेरा सब कुछ है।”
सुबह होने से पहले हम थककर लेटे थे। दीदी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को सहला रही थीं।
“आरव, ये हमारा जिस्मानी रिश्ता है। दुनिया इसे गलत कहेगी, लेकिन मेरे लिए ये प्यार है। जब तक हम दोनों हैं, ये रिश्ता चलेगा।”
मैंने दीदी के माथे को चूमा। “हाँ दीदी। अब आप मेरी हो। आपकी चूत, आपकी गांड, आपकी चूचियाँ — सब मेरे हैं।”
उस रात के बाद हमारा रिश्ता पूरी तरह बदल गया। दिन में हम भाई-बहन बने रहते, लेकिन रात को दीदी मेरे बेड पर आ जातीं। कभी वो मुझे चोदतीं, कभी मैं उन्हें। कभी शावर में, कभी किचन में, कभी बालकनी में। दीदी अब पूरी तरह संतुष्ट रहती हैं। उनकी चूत हर रात मेरे लंड से भरती है।
ये हमारा गुप्त जिस्मानी रिश्ता है — दीदी और छोटे भाई के बीच। दुनिया से छुपा, लेकिन हमारे लिए सबसे खूबसूरत।