बड़े घर की औरतों की चुदाई

Elite High Class Women Sex Story – दिल्ली के पॉश इलाके में वो विशाल हवेली थी, जहाँ रईसों की जिंदगी की चमक दिखती थी। मैं, अर्जुन, 30 साल का जवान मर्द, उस हवेली में ड्राइवर की नौकरी करता था। मेरा 8 इंच का मोटा, काला लंड हमेशा किसी चूत की तलाश में रहता था। उसकी टोपी गीली होकर चमकती थी, और उसकी नसें उभरी हुई थीं, जैसे कोई हथियार जो चूत को फाड़ने के लिए तैयार हो। हवेली में काम करते हुए मुझे बड़े घर की औरतों की रंगीन जिंदगी का पता चला। वहाँ की मालकिन, उनकी बहू और नौकरानी—सब की चूत में एक भूख थी, जो मेरे लंड को बुला रही थी।

हवेली की मालकिन थीं शालिनी, 45 साल की गोरी, भरे हुए जिस्म वाली औरत। उनकी चूचियाँ बड़ी, गोल और रसीली थीं, जैसे दो पके तरबूज, जो उनकी महँगी साड़ियों में हमेशा उभरे रहते थे। उनके निप्पल साड़ी के नीचे से हल्के-हल्के दिखते थे, जैसे दो सख्त काले मोती। उनकी कमर में हल्की चर्बी थी, जो उन्हें और सेक्सी बनाती थी, और उनकी गाँड मोटी, नरम और गोल थी, जो चलते वक्त हिलती थी। उनका पति बूढ़ा और बीमार था, और शालिनी की चूत सालों से भूखी थी। उनकी बहू, रिया, 28 साल की थी, स्लिम और हॉट। उसकी चूचियाँ मध्यम, सख्त और गोल थीं, जैसे दो पके संतरे, और उसकी गाँड टाइट और उठी हुई थी। उसका पति, शालिनी का बेटा, बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहता था। तीसरी थी नौकरानी, काजल, 25 साल की साँवली, मस्त और रसीली लड़की, जिसकी चूचियाँ और गाँड भरी हुई थीं।

ये कहानी और भी हॉट और सेक्सी है :  पडोस वाली आंटी से एक कप दूध मांगने गया तो दूध के साथ चूत भी मिली

एक दिन की बात है। मार्च की दोपहर थी, और हवेली में सन्नाटा छाया था। मैं गैरेज में गाड़ी साफ कर रहा था। पसीने से मेरी बनियान भीग चुकी थी, और मेरा लंड पजामे में सख्त होकर उभर रहा था। तभी शालिनी मालकिन गैरेज में आईं। वो हल्की नीली साड़ी में थीं, और उनका पल्लू पसीने से तर होकर उनकी चूचियों पर चिपक गया था। उनकी चूचियाँ ब्लाउज़ में से बाहर झाँक रही थीं, और पसीने की बूँदें उनकी गहरी दरार में लुढ़क रही थीं। “अर्जुन, गर्मी बहुत है ना?” उन्होंने कहा और मेरे पास आकर खड़ी हो गईं। उनकी नज़र मेरे लंड के उभार पर ठहर गई।

“हाँ मालकिन, बदन जल रहा है,” मैंने कहा और उनकी चूचियों को घूरने लगा। उनकी भारी गोलाई मुझे पागल कर रही थी। “पानी पिएगा?” उन्होंने पूछा और मुझे अपने कमरे में चलने को कहा। मैं उनके पीछे गया। उनके कमरे में एसी चल रहा था, लेकिन उनकी साड़ी अभी भी पसीने से तर थी। उन्होंने मुझे पानी का गिलास दिया, और गिलास लेते वक्त उनकी उंगलियाँ मेरे हाथ से टकराईं। मेरे लंड में करंट दौड़ गया। “मालकिन, आप भी तो पसीने से तर हैं,” मैंने कहा और उनके चेहरे पर बहते पसीने को अपने हाथ से पोंछ दिया। मेरा हाथ उनके गले तक गया, और उनकी गर्मी ने मेरे लंड को और सख्त कर दिया। “अर्जुन, गर्मी तो अंदर से भी लग रही है,” उन्होंने धीरे से कहा और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। उनकी चूचियाँ ब्लाउज़ में उछल रही थीं।

मैं समझ गया कि मालकिन की चूत में आग लगी है। मैंने उनकी मोटी कमर पकड़ी और उन्हें अपनी ओर खींच लिया। उनका भरा हुआ जिस्म मेरे सीने से टकराया। “मालकिन, ये गर्मी मैं बुझा दूँ?” मैंने कहा और उनकी चूचियों पर हाथ रख दिया। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस उनकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने उनके ब्लाउज़ के बटन खोले, और उनकी चूचियाँ नंगी हो गईं। वो गोरी, भारी और मस्त थीं, और उनके निप्पल काले और सख्त थे। “मालकिन, आपकी चूचियाँ तो माल हैं,” मैंने कहा और एक चूची को मुँह में ले लिया। मैं उनके निप्पल को चूसने लगा, और दूसरी चूची को जोर-जोर से मसलने लगा। “आह्ह… अर्जुन… धीरे…” वो सिसक रही थीं। मैंने उनकी साड़ी खोल दी। उनकी चूत की घनी झाँटें गीली थीं, और उनकी फाँकें चमक रही थीं। “मालकिन, आपकी चूत तो आग है,” मैंने कहा और अपनी उंगली उनकी चूत में डाल दी। “आह्ह… अर्जुन… चोदो ना,” वो चीख पड़ीं।

ये कहानी और भी हॉट और सेक्सी है :  भाई द्वारा बहन को चुदाई के जाल में फंसाने की कहानी

मैंने अपना पजामा उतारा। मेरा लंड सख्त और मोटा था। मैंने शालिनी को बेड पर लिटाया और उनकी टाँगें चौड़ी कर दीं। उनकी चूत खुल गई। मैंने अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया। “आह्ह… अर्जुन… फाड़ दो,” वो चिल्लाईं। मैंने उनकी चूचियाँ दबाते हुए चुदाई शुरू की। “मालकिन, आपकी चूत को भोसड़ा बना दूँगा,” मैं बोला। मेरा लंड उनकी चूत को चीर रहा था। “अर्जुन, और जोर से… चोदो,” वो चीख रही थीं। आधे घंटे बाद मैंने उनकी गाँड भी चोदी। “मालकिन, आपकी गाँड मस्त है,” मैंने कहा और उनका माल उनकी चूत में छोड़ दिया।

रिया बहू की बारी

अगले दिन रिया बहू गैरेज में आई। वो टाइट जीन्स और टॉप में थी। उसकी चूचियाँ टॉप में उभरी थीं। “अर्जुन, गाड़ी तैयार करो,” उसने कहा, लेकिन उसकी नज़र मेरे लंड पर थी। मैंने उसे गाड़ी में बिठाया और सुनसान रास्ते पर ले गया। “बहू जी, आपकी चूत को भी लंड चाहिए?” मैंने कहा। उसने शरमाते हुए हाँ कहा। मैंने गाड़ी रोकी और उसकी जीन्स उतार दी। उसकी चूत टाइट और गीली थी। मैंने उसकी चूत में लंड डाला। “आह्ह… अर्जुन… चोदो,” वो चीखी। मैंने उसकी चूचियाँ मसलीं और उसे चोदा। “बहू जी, आपकी चूत मस्त है,” मैंने कहा और उसकी गाँड भी मारी।

काजल नौकरानी का खेल

रात को काजल किचन में थी। उसकी साड़ी उसकी गाँड से चिपकी थी। “काजल, तेरी चूत भी चुदवाएगी?” मैंने कहा। वो हँसी और बोली, “चोद ना।” मैंने उसे किचन में लिटाया और उसकी चूत में लंड पेल दिया। “आह्ह… साहब… फाड़ दो,” वो चिल्लाई। मैंने उसकी गाँड भी चोदी। “काजल, तेरी चूत और गाँड माल हैं,” मैंने कहा।

ये कहानी और भी हॉट और सेक्सी है :  सोते हुए इतना छेड़ा मेरा भाई कि मेरी चूत गीली हो गई

तीनों की चुदाई

एक दिन तीनों एक साथ थीं। मैंने शालिनी की चूत, रिया की गाँड और काजल के मुँह में लंड डाला। “सब की चूत फाड़ दूँगा,” मैं बोला। रात भर चुदाई चली, और उनकी चूतें मेरे माल से भर गईं। “अर्जुन, ये हमारा राज़ रहे,” शालिनी बोलीं। मैंने उनकी चूचियाँ चूसीं और कहा, “मालकिन, जब चूत गर्म होगी, लंड तैयार रहेगा।”