खेत में ताई की चुदाई

मेरा नाम मनीष है, 24 साल का, और मैं हरियाणा के एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। मैं जवान हूँ, खेतों में काम करता हूँ, और मेरा जिस्म मेहनत की वजह से गठीला है। मेरा 7 इंच का लंड गाँव की लड़कियों की नजरों में हमेशा रहता है, लेकिन मेरी कहानी की नायिका मेरी ताई, सुनीता, है। ताई 35 साल की थीं, लेकिन उनका जिस्म 25 साल की लड़की जैसा था। उनकी साँवली त्वचा, बड़ी-बड़ी रसीली चूचियाँ, पतली कमर और गोल-मटोल गांड उनकी साड़ी में उभरकर हर मर्द के मन में आग लगा देती थी। उनके लंबे काले बाल और भूरी आँखें जैसे चूमने की खुली दावत दे रही हों।

ताई मेरे ताऊ की दूसरी पत्नी थीं। ताऊ खेतों में काम करते थे, लेकिन ज्यादातर समय बाहर रहते थे। ताई अकेले घर संभालती थीं, और मैं अक्सर उनके खेतों में मदद करने जाता था। मैंने कई बार नोटिस किया कि जब मैं खेतों में काम करता, तो ताई की नजरें मेरे गठीले जिस्म पर ठहर जाती थीं। उनकी वो शरारती मुस्कान और मेरे सीने को घूरने वाली आँखें मेरे लंड में हलचल मचा देती थीं। मुझे यकीन था कि ताई की टाइट चूत मेरे मोटे लंड की भूखी थी।

वो एक जुलाई की उमस भरी दोपहर थी। गाँव में बारिश की बूंदें गिर रही थीं, और खेतों में काम करने का मजा ही कुछ और था। मैं और ताई धान के खेत में काम कर रहे थे। ताई ने उस दिन एक पतली सी लाल साड़ी पहनी थी, जो उनके गदराए जिस्म से चिपक रही थी। उनकी चूचियाँ साड़ी में साफ उभर रही थीं, और बारिश की वजह से उनका ब्लाउज गीला होकर और पारदर्शी हो गया था। मैं उनकी चूचियों को घूर रहा था, और ताई ने मुझे देखकर मुस्कुरा दिया। “मनीष, काम कर, या बस मुझे ही देखता रहेगा?” उन्होंने शरारत भरे लहजे में कहा।

मैंने हँसते हुए जवाब दिया, “ताई, तुम्हारी चूचियाँ देखकर काम करने का मन नहीं करता।” मेरी बात सुनकर ताई की आँखें चमक उठीं। “मनीष, तेरा लंड मेरी चूत को तड़पा रहा है। खेत में कोई नहीं है, कुछ कर ना,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। मेरा दिल धक् से रह गया। मैंने ताई को पास खींचा और उनके रसीले होंठों को अपने होंठों से चूस लिया। वो चुंबन इतना गहरा था कि मेरे जिस्म में आग सी लग गई।

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ताई ने मेरी बनियान उतार दी और मेरे गठीले सीने पर अपने नाखून फिराए। “मनीष, तेरा जिस्म तो लोहे जैसा है,” उन्होंने फुसफुसाया। मैंने ताई की साड़ी का पल्लू सरका दिया, और उनकी चूचियाँ उनके गीले ब्लाउज में उभर आईं। मैंने ब्लाउज के बटन खोले, और उनकी काली ब्रा में उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ कैद थीं। मैंने ब्रा उतार दी, और ताई की रसीली चूचियाँ मेरे सामने थीं—गोल, टाइट और निप्पल्स तने हुए।

मैंने हौले-हौले ताई की चूचियों को अपने हाथों में लिया और दबाना शुरू किया। उनकी सिसकारियाँ खेत में गूँज उठीं। “मनीष, मेरी चूचियों को और दबा… कितना मजा आ रहा है,” उन्होंने सिसकारी भरे लहजे में कहा। मैंने उनके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया, उन्हें चूसते और हल्के से काटते हुए। ताई की चूत गीली हो चुकी थी, और उनकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिए, और उनकी काली पैंटी में उनकी टाइट चूत की शेप साफ दिख रही थी। मैंने पैंटी नीचे सरकाई, और ताई की चूत मेरे सामने थी—गुलाबी, गीली और बिना बालों की।

मैंने घुटनों के बल बैठकर अपनी जीभ ताई की चूत पर फिराई। उनकी चीखें खेत की शांति को भंग करने लगीं। “मनीष, मेरी चूत को चाट… और गहरा,” उन्होंने चिल्लाया। मैंने अपनी जीभ उनकी चूत की गहराइयों में डाली, और उनका रस मेरे मुँह में बहने लगा। मैंने उनके क्लिट को चूसा, और ताई की कमर उछलने लगी। “मनीष, तू मेरी चूत को पागल कर रहा है,” वो सिसक रही थीं।

ताई ने मेरी पैंट खींची और मेरा मोटा लंड बाहर निकाला। “मनीष, तेरा लंड तो हथौड़ा है,” उन्होंने शरारत से कहा, और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगीं। फिर उन्होंने उसे अपने मुँह में लिया। उनकी जीभ मेरे लंड पर लपलपाती रही, और मेरी सिसकारियाँ तेज हो गईं। “ताई, तेरा मुँह मेरे लंड को निचोड़ रहा है,” मैंने सिसकते हुए कहा। ताई ने मेरे लंड को गहराई तक चूसा, और मैंने उनके बाल पकड़ लिए।

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मैंने ताई को खेत की मिट्टी पर लिटाया और उनकी टाँगें फैलाकर अपना मोटा लंड उनकी टाइट चूत में डाला। ताई चीख पड़ीं, “मनीष, तेरा लंड मेरी चूत को चीर रहा है!” मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया, और उनकी सिसकारियाँ तेज हो गईं। “और जोर से, मनीष… मेरी चूत को फाड़ दे,” उन्होंने चीखते हुए कहा। मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई, और हर धक्के के साथ उनकी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने उनके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया, उन्हें चूसते और काटते हुए, और ताई की चीखें और तेज हो गईं।

मैंने ताई को पलट दिया और डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। मेरा लंड उनकी टाइट चूत में इतनी गहराई तक जा रहा था कि हमारा जिस्म एक-दूसरे में घुल गया। “हाँ, मनीष… और गहरा… मेरी चूत को रगड़ दे,” ताई चिल्ला रही थीं। मैंने उनके नितंबों को थपथपाया, और उनकी चीखें खेत में गूँज रही थीं। बारिश की बूंदें हमारे जिस्म पर गिर रही थीं, और मिट्टी की सोंधी खुशबू चुदाई के मजे को और बढ़ा रही थी। मैंने उनके बाल पकड़े और उन्हें और जोर से चोदा, जैसे मेरी सारी वासना उनकी चूत में उतर रही हो।

हमने खेत के हर कोने में चुदाई की। धान के पौधों के बीच, मिट्टी पर, और फिर एक पेड़ के नीचे। ताई ने मेरे लंड को बार-बार अपने मुँह में लिया, और उनकी जीभ ने मुझे पागल कर दिया। “मनीष, तेरा लंड मेरी चूत का राजा है,” उन्होंने सिसकारी भरे लहजे में कहा। बारिश की बूंदें और हमारी चीखें एक-दूसरे में मिल रही थीं। शाम ढलने लगी थी, लेकिन हमारा जुनून थम नहीं रहा था।

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मैंने ताई को अपनी गोद में बिठाया और फिर से चोदना शुरू किया। इस बार, ताई ऊपर थीं, और उनकी कमर हर धक्के के साथ लय में हिल रही थी। उनकी चूचियाँ मेरे चेहरे के सामने उछल रही थीं, और मैंने उन्हें चूसते हुए ताई को और जोर से चोदा। “मनीष, तेरी टाइट चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है,” मैंने कहा, और ताई ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी।

जब शाम गहरी हो गई, हम दोनों मिट्टी से सने, पसीने और बारिश से लथपथ, एक-दूसरे की बाहों में लिपटे थे। ताई ने मेरे सीने पर सिर रखा और फुसफुसाया, “मनीष, तेरे मोटे लंड ने मेरी चूत को खेत में रंगीन कर दिया।” मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा, “ताई, तेरी टाइट चूत और रसीली चूचियाँ मेरे लंड को दीवाना बना गईं।”

ताई ने मेरे होंठों पर एक गहरा चुंबन लिया, अपनी साड़ी ठीक की, और एक मादक मुस्कान के साथ बोलीं, “मनीष, जब भी ताऊ बाहर जाएँगे, मेरी चूत खेत में तेरा लंड माँगेगी।” मैंने उनकी कमर पकड़ी और कहा, “ताई, मेरा लंड हर बार हाजिर रहेगा।”

जैसे ही हम खेत से वापस चले, ताई ने पलटकर देखा और एक शरारती पलक झपकी। “ये दोपहर हमारी थी, मनीष। लेकिन ये जुनून कभी खत्म नहीं होगा।” मैं जानता था, ताई की टाइट चूत और गदराया जिस्म मेरे लंड की आग को हर बार खेत में सुलगाता रहेगा, और गाँव की वो मिट्टी हमारी वासना की गवाह बनेगी।