पति ने मुझे गैर मर्द के साथ सुलाया

रात गहरी हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश के उस छोटे से शहर में, जहाँ गलियों में कुत्ते भौंकते थे और सड़कें बारिश से भीगकर चमक रही थीं, ज्योति के घर की एकमात्र बल्ब की रोशनी धीमी पड़ रही थी। कमरे में हवा ठंडी थी, लेकिन ज्योति के शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। वो बिस्तर पर करवटें बदल रही थी, साड़ी की सिलवटें उसके पैरों में उलझ रही थीं। बाहर से बारिश की आवाज आ रही थी—टप-टप, टप-टप—जैसे कोई धड़कनें गिन रहा हो। लेकिन उसकी अपनी धड़कनें इससे कहीं तेज थीं।

वो 28 की थी। गोरी, नाजुक कद-काठी, लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते थे। शादी को पाँच साल हो गए थे। राहुल के साथ जीवन साधारण था—सुबह उठना, चाय बनाना, घर संभालना, रात को पति के बगल में सो जाना। लेकिन आज रात कुछ अलग था। राहुल घर में नहीं था। वो बाहर गया था—कहाँ, ये ज्योति को नहीं पता था। या शायद जानना नहीं चाहती थी। क्योंकि घर में अब सिर्फ वो और विशाल थे। विशाल—राहुल का पुराना दोस्त, 35 साल का, लंबा, चौड़ा कंधों वाला, जिसकी आवाज में एक गहराई थी जो ज्योति को हमेशा बेचैन कर देती थी। वो आज रात यहाँ रुका था। और राहुल ने खुद ही ये इंतजाम किया था।

शाम को जब विशाल आया था, तब राहुल ने ज्योति को एकांत में बुलाया था। उसकी आँखें नीची थीं, आवाज काँप रही थी। “ज्योति… सुन। विशाल से मैंने बहुत पैसे लिए हैं। कर्ज है, बहुत बड़ा। वो माफ कर देगा… अगर…” राहुल रुक गया। ज्योति ने पूछा, “अगर क्या?” राहुल ने सिर झुकाकर कहा, “अगर तू आज रात उसके साथ… मतलब… वो तुझे चाहता है। बहुत दिनों से। मैंने सोचा… हमारा भविष्य…” ज्योति का चेहरा सफेद पड़ गया। “तुम क्या कह रहे हो, राहुल? मैं तुम्हारी बीवी हूँ!” लेकिन राहुल ने हाथ जोड़े। “बस एक रात। हमारे लिए। बच्चे के स्कूल का खर्चा, घर का लोन… सब खत्म हो जाएगा। प्लीज, ज्योति।” ज्योति रो पड़ी। लेकिन विरोध कमजोर था। परिवार की मजबूरी, समाज की नजरें, और कहीं गहरे में एक छिपी हुई जिज्ञासा—विशाल की वो नजरें जो हमेशा उसके शरीर पर ठहर जाती थीं।

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अब रात के दो बज चुके थे। ज्योति उठी। गला सूख रहा था। वो रसोई की तरफ गई। अंधेरे में पानी का जग ढूंढ रही थी कि पीछे से आवाज आई। “नींद नहीं आ रही, ज्योति?” विशाल की आवाज। गहरी, गरम। ज्योति चौंककर मुड़ी। विशाल वहाँ खड़ा था—काली टी-शर्ट और पजामा में। उसकी छाती पर बाल झांक रहे थे, आँखों में एक अजीब सी चमक। ज्योति ने नजरें नीची कर लीं। “हाँ… थोड़ी…” वो हकलाई। विशाल करीब आया। उसकी बॉडी से हल्की सी महक आ रही थी—अftershave और पुरुषत्व की। “राहुल ने सब बताया है। डर मत। मैं तुम्हें कभी तकलीफ नहीं दूँगा।” उसने ज्योति का कंधा छुआ। वो स्पर्श बिजली-सा लगा। ज्योति का शरीर सिहर उठा। “ये… गलत है,” वो फुसफुसाई। विशाल ने मुस्कुराकर कहा, “गलत वो होता है जो मजबूरी में न हो। ये तो हमारी मर्जी है। राहुल की भी, मेरी भी… और तुम्हारी?” ज्योति चुप रही। उसका दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि लग रहा था विशाल सुन लेगा।

वे दोनों लिविंग रूम में आ गए। सोफे पर बैठे। बारिश की आवाज अब और तेज हो गई थी। विशाल ने ज्योति का हाथ पकड़ा। उसकी हथेली गर्म थी। “तुम्हें पता है, पहली बार जब तुमसे मिला था, मैंने सोचा था—ये लड़की किसी और की नहीं हो सकती।” ज्योति का चेहरा लाल हो गया। “ऐसा मत कहिए…” विशाल ने उसके बालों को छुआ। “क्यों? सच तो है। तुम्हारी आँखें, तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारा ये शरीर… सब कुछ मुझे पागल कर देता है।” उसने धीरे से ज्योति को अपनी तरफ खींचा। ज्योति ने विरोध नहीं किया। विशाल का चेहरा करीब आया। उसकी सांस ज्योति के गाल पर लग रही थी। फिर होंठ मिले। नरम, धीमा चुंबन। ज्योति की आँखें बंद हो गईं। पहली बार किसी ने इतने प्यार से चूमा था। राहुल हमेशा जल्दबाजी में होता था। लेकिन विशाल धीरे-धीरे होंठ चूस रहा था, जीभ से खेल रहा था। ज्योति का शरीर पिघलने लगा।

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विशाल के हाथ उसकी पीठ पर फिसले। साड़ी का पल्लू सरक गया। नंगी कमर पर उँगलियाँ घूमने लगीं। ज्योति की सांसें तेज हो गईं। “विशाल… रुकिए…” लेकिन उसकी आवाज में रोकने की ताकत नहीं थी। विशाल ने उसके कानों में फुसफुसाया, “शश… बस महसूस करो।” उसने ब्लाउज के हुक खोले। ब्रा दिखी। ज्योति ने हाथ से छिपाने की कोशिश की, लेकिन विशाल ने धीरे से हाथ हटाया। “इतनी शर्म क्यों? तुम बहुत खूबसूरत हो।” ब्रा उतरी। उसके स्तन बाहर आए—गोल, निप्पल्स सख्त। विशाल ने एक को मुँह में लिया। ज्योति की सिसकारी निकली—”आह्ह…” वो कभी इतना सुख नहीं महसूस किया था। विशाल चूस रहा था, जीभ घुमा रहा था। दूसरा स्तन सहला रहा था। ज्योति की चूत में गीलापन फैल रहा था। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी।

वे बेडरूम में चले गए। ज्योति का मन अब विरोध नहीं कर रहा था। विशाल ने उसे बिस्तर पर लिटाया। साड़ी पूरी उतार दी। अब सिर्फ पेटीकोट और पैंटी। विशाल ने अपनी टी-शर्ट उतारी। उसकी छाती मजबूत, बालों से ढकी। ज्योति की नजरें उसके पजामा पर गईं। उभार साफ दिख रहा था। विशाल ने पजामा उतारा। उसका लंड बाहर आया—लंबा, मोटा, सख्त। ज्योति की सांस रुक गई। “ये… बहुत बड़ा है…” वो मन ही मन बोली। विशाल मुस्कुराया। “डरो मत। मैं धीरे-धीरे करूँगा।” वो ज्योति के ऊपर आया। शरीर की गर्मी ज्योति को जला रही थी। उसने ज्योति की पैंटी उतारी। चूत नंगी, गीली। विशाल ने उँगली से सहलाया। “कितनी गीली हो गई है… चूत तेरी तैयार है मेरे लिए।” ज्योति शरमा गई, लेकिन बोली, “हाँ… छुओ…”

विशाल ने जीभ लगाई। चाटने लगा। ज्योति का शरीर काँप उठा। “आह… विशाल… कितना अच्छा लग रहा है…” वो कभी नहीं सोचा था कि कोई ऐसा कर सकता है। राहुल ने कभी नहीं किया। विशाल जीभ अंदर डाल रहा था, चूस रहा था। ज्योति की कमर उछल रही थी। “आ रही हूँ… ओह्ह…” और वो झड़ गई। पूरा शरीर काँप गया। विशाल ऊपर आया। लंड चूत के मुहाने पर रखा। “अब असली मजा शुरू होता है।” धीरे से धक्का दिया। लंड अंदर घुसा। ज्योति को दर्द हुआ—”आह… धीरे…” लेकिन फिर सुख की लहर। “कितना मोटा… कितना गहरा…” विशाल धक्के मारने लगा। धीरे, फिर तेज। ज्योति की गांड दबा रहा था। “तेरी गांड कितनी रसीली है… कितनी मुलायम…” ज्योति चीख रही थी—”चोदो मुझे… जोर से… आह… विशाल…” कमरा उनकी आवाजों से भर गया। पसीना, सिसकारियाँ, धड़कनें। आखिर विशाल तेज हुआ। “अंदर आ रहा हूँ…” और झड़ गया। गर्म वीर्य ज्योति के अंदर। दोनों थककर लेट गए।

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सुबह हुई। बारिश थम गई थी। ज्योति बिस्तर पर लेटी थी, चादर ओढ़े। विशाल तैयार हो चुका था। वो ज्योति के माथे पर चुंबन करके बोला, “शुक्रिया, ज्योति। ये रात मैं कभी नहीं भूलूँगा।” ज्योति चुप रही। आँखों में आँसू थे, लेकिन एक अजीब सी तृप्ति भी। विशाल चला गया। थोड़ी देर बाद राहुल लौटा। उसने ज्योति को देखा, कुछ कहा नहीं। बस चुपचाप चाय माँगी। ज्योति उठी, चाय बनाई। लेकिन उसके मन में अब वो पुरानी ज्योति नहीं थी। कुछ टूट गया था, कुछ जुड़ गया था। वो सोच रही थी—क्या ये सिर्फ एक रात थी? या अब हर रात में विशाल की याद आएगी? राहुल के साथ वो कभी इतना महसूस नहीं कर पाएगी। और ये विचार उसे डराता भी था, लुभाता भी।

दिन बीतते गए। कर्ज माफ हो गया। घर में शांति थी। लेकिन ज्योति की आँखों में एक नई चमक थी। कभी-कभी वो खिड़की से बाहर देखती, बारिश की याद आती। और मन में एक सवाल उठता—अगर विशाल फिर आए, तो क्या होगा? क्या वो फिर मना कर पाएगी? या अब ये उसकी अपनी इच्छा बन चुकी है? जवाब उसके पास नहीं था। लेकिन वो जानती थी—उस रात ने उसकी जिंदगी बदल दी थी। हमेशा के लिए।

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