मेरा नाम मीना है। उम्र ४२ साल। मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय घर की गृहिणी हूँ। मेरे पति पिछले दस साल से दुबई में नौकरी करते हैं। वो साल में सिर्फ एक या दो बार घर आ पाते हैं। घर में सिर्फ मैं और मेरा इकलौता बेटा आरव रहता है। आरव अब २१ साल का जवान हो चुका है। कॉलेज में इंजीनियरिंग पढ़ रहा है, रोज जिम जाता है। उसका बदन देखकर कोई भी लड़की फिदा हो सकती है — लंबा कद, चौड़ी छाती, मोटी-मोटी बाहें, कसे हुए पेट पर साफ नजर आने वाली लकीरें और वो आँखें जो अब मुझे भी अंदर तक हिला देती हैं।
आरव बचपन से ही बहुत लगाव रखता था मुझसे। वो हर वक्त मेरे गले लगता, “मम्मी, मुझे बहुत प्यार है आपसे” कहता। लेकिन पिछले एक साल से उसका गले लगाना बदल गया था। अब वो मुझे देर तक छाती से चिपकाए रखता, उसकी साँसें मेरे गले पर गर्म-गर्म पड़तीं, उसकी मजबूत बाहें मेरी कमर को कसकर दबातीं और कभी-कभी उसका लंड मेरी जाँघ से हल्का-हल्का दबता महसूस होता। मैं खुद को समझाती कि ये सब माँ-बेटे का प्यार है, लेकिन अंदर कहीं मेरी चूत भी गीली होने लगी थी। सालों से पति की गैरमौजूदगी में मेरी चूत सूखी पड़ी थी। रात को अकेले लेटकर मैं कई बार उँगलियाँ डालकर खुद को राहत देती, लेकिन वो खालीपन कभी नहीं भरता था।
उस दिन शाम का वक्त था। बाहर तेज बारिश हो रही थी। मैं रसोई में चाय बना रही थी। आरव कॉलेज से वापस आया। उसके बाल और कपड़े बारिश से भीगे हुए थे। जैसे ही वो अंदर आया, उसने मुझे पीछे से जोर से गले लगा लिया। उसकी छाती मेरी पीठ से पूरी तरह चिपक गई। उसकी गर्म साँसें मेरे कान पर पड़ रही थीं।
“मम्मी… आज पूरे दिन आपको बहुत याद आई,” उसने धीमी लेकिन भारी आवाज में कहा। उसकी बाहें मेरी कमर को और कस गईं। मैं महसूस कर रही थी कि उसके लंड का उभार मेरी गांड पर दब रहा है।
मैंने हल्का सा विरोध किया, “आरव बेटा… छोड़ो ना… मैं चाय बना रही हूँ।”
लेकिन आरव ने मुझे घुमा दिया। अब हम आमने-सामने थे। उसकी आँखों में वो चमक थी जो मैं पहले कभी नहीं देखी थी। “मम्मी, आप जानती हैं ना कि पापा कितने साल से आपको छूते तक नहीं। आप जवान हो, खूबसूरत हो। मैं आपको वो प्यार दे सकता हूँ जो आप deserve करती हो।”
मैं स्तब्ध रह गई। “आरव… ये क्या बोल रहे हो? मैं तुम्हारी माँ हूँ…”
आरव ने मेरे होंठों पर अपना मुंह रख दिया। उसका किस बहुत गहरा, भूखा और जुनूनी था। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर मेरी जीभ को चूसने लगी। मैंने पहले विरोध किया, लेकिन धीरे-धीरे मेरा बदन पिघलने लगा। सालों की दबी प्यास जाग उठी थी। आरव ने मुझे उठाकर सीधे बेडरूम में ले गया।
कमरे में हल्की रोशनी थी। उसने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी साड़ी का पल्लू खींच दिया। मेरी भारी चूचियाँ ब्लाउज में उभरी हुई थीं। आरव ने ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए। ब्रा का हुक खोलते ही मेरी गोरी, भारी चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। आरव ने दोनों चूचियों को हाथों में भर लिया और जोर से मसलने लगा।
“मम्मी… आपकी चूचियाँ कितनी भारी और नरम हैं… मैं इन्हें सालों से चूसना चाहता था,” कहते हुए उसने एक चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ निप्पल के चारों तरफ घूम रही थी, कभी हल्का-हल्का काट रहा था। मैं सिसकार रही थी, “आह… आरव… धीरे बेटा… आह… बहुत अच्छा लग रहा है…”
आरव ने मेरी साड़ी पूरी तरह कमर तक उठा दी। पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी। मैं पूरी नंगी उसके सामने लेटी थी। आरव ने अपनी सारी कपड़े उतार दिए। उसका लंड बाहर आया — बहुत मोटा, लंबा, नसें फूली हुईं और पूरी तरह खड़ा।
आरव मेरी जाँघों के बीच बैठ गया। उसने मेरी चूत पर गर्म साँसें छोड़ीं और फिर अपनी जीभ फेर दी। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की फाँक में घुस गई। वो जोर-जोर से चाटने लगा — क्लिट को चूसता, अंदर जीभ डालकर चक्कर काटता, कभी दो उँगलियाँ डालकर तेजी से अंदर-बाहर करता। “मम्मी… आपकी चूत कितनी स्वादिष्ट और गीली है… मैं इसे चूस-चूसकर खा जाऊँगा आज…”
मैं कमर उठा-उठाकर चीख रही थी। “आरव… आह… और चाटो… अपनी माँ की चूत को चूसो… हाँ… वहीं… आह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही देर में मैं पहली बार जोर से झड़ गई। मेरा गर्म रस उसके मुँह और चेहरे पर फैल गया। आरव ने सब चाट लिया।
अब आरव मेरे ऊपर आ गया। उसने अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। सिर अंदर गया। फिर एक जोरदार धक्का — पूरा मोटा लंड मेरी चूत में घुस गया। “आआह… फट गई मेरी चूत… आरव… बहुत मोटा है तेरा लंड… आह… धीरे… आह…”
आरव ने धीरे-धीरे लय बनाई। हर धक्के पर उसके अंडे मेरी गांड से टकरा रहे थे। फच-फच की तेज आवाज कमरे में गूँज रही थी। वो लगातार २५-२८ मिनट तक मुझे चोदता रहा। मैं कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में उसने जोर-जोर से धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर गरम-गरम पानी छोड़ दिया।
लेकिन आरव अभी थका नहीं था। उसने मुझे पलटकर कुत्ते की तरह किया। मेरी गोल-मटोल गांड ऊपर थी। उसने गांड पर कई थप्पड़ मारे और फिर से पूरा लंड अंदर डाल दिया। “मम्मी… आपकी गांड बहुत सॉफ्ट और गोल है… आज तो मैं आपको पूरी तरह अपना बना लूँगा…”
वो मेरी कमर पकड़कर पीछे से तेज-तेज धक्के मार रहा था। हर धक्के पर मेरी चूचियाँ झूल रही थीं। मैं तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी। आरव ने इस बार मुझे पूरे ३० मिनट चोदा। मैं चार बार झड़ गई।
फिर उसने मुझे गोद में उठा लिया। मैं उसकी गोद में बैठकर उछलने लगी। उसका मोटा लंड मेरी चूत में पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। मेरी चूचियाँ उसके मुँह के सामने उछल रही थीं। वो उन्हें चूसता, काटता और मेरी गांड पर थप्पड़ मारता। “मम्मी… उछलो और तेज… अपनी चूत से मेरे लंड को निचोड़ो…”
मैं पागल होकर उछल रही थी। “आरव… मैं तेरी हूँ… तेरी माँ तेरी रंडी है… चोद मुझे पूरी रात… आह… हाँ… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो…”
आरव ने मुझे पूरी रात चोदा। पाँच बार अलग-अलग पोजिशन में — कभी दीवार से सटाकर, कभी शावर के नीचे, कभी फर्श पर। हर बार लंबी, जोरदार और गहरी चुदाई। मेरी चूत सूज गई थी, लेकिन खुशी से भरी हुई थी।
सुबह होने से पहले मैं आरव के सीने पर सिर रखकर लेटी थी। उसका लंड अभी भी मेरी जाँघ से सटा हुआ था।
“आरव… गले लगाने की सजा तूने बहुत खतरनाक और प्यारी तरीके से दी है। अब जब भी मन करे, अपनी माँ को गले लगा लेना… और फिर सजा देना,” मैंने शरमाते हुए कहा।
आरव ने मेरी चूत पर हाथ फेरा और बोला, “मम्मी, अब हर रात आपको गले लगाने की सजा मिलेगी।”