मेरा नाम पूजा है। उम्र २६ साल। शादी को ढाई साल हो चुके हैं। मेरे पति राहुल एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं। घर में ससुर जी अकेले रहते हैं। सास जी का देहांत हो चुका है। ससुर जी सुरेश राणा, उम्र ५२ साल, लेकिन देखने में ४५ से ज्यादा नहीं लगते। लंबा कद, चौड़ी छाती, मजबूत बाहें और खेती-बाड़ी की वजह से तना हुआ बदन। उनकी नजरें हमेशा मेरे बदन पर टिकी रहती हैं, लेकिन मैं चुप रहती थी।
मॉनसून का मौसम था। दिल्ली में बारिश रुक ही नहीं रही थी। उस दिन भी सुबह से तेज बारिश हो रही थी। राहुल सुबह ही मुंबई के लिए निकल गए थे। घर में सिर्फ मैं और ससुर जी थे। मैं छत पर कुछ कपड़े सुखाने गई थी। हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी — सफेद रंग की, जो बारिश में भीगते ही पारदर्शी हो जाती है।
अचानक बारिश और तेज हो गई। मैं जल्दी-जल्दी कपड़े समेट रही थी कि ससुर जी छत पर आ गए। उनके हाथ में छाता था।
“पूजा बेटी, भीग रही है तू। आ, छाता ले,” उन्होंने कहा।
लेकिन छत पर पानी का बहाव तेज था। हम दोनों भीग गए। मेरी साड़ी पूरी तरह भीग चुकी थी। साड़ी मेरे बदन से चिपक गई थी। मेरी भारी चूचियाँ, काली ब्रा, पेट की नाभि — सब कुछ साफ दिख रहा था। ससुर जी की नजरें मेरे बदन पर अटक गईं।
“ससुर जी… चलिए अंदर चलते हैं,” मैंने शरमाते हुए कहा।
लेकिन ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। “पूजा, तू आज बहुत खूबसूरत लग रही है। ये गीली साड़ी तेरे बदन पर… मैं काबू नहीं रख पा रहा।”
उनकी आवाज में भूख थी। मैंने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन वो मजबूती से पकड़े हुए थे। बारिश अब और तेज हो गई थी। छत पर हम दोनों अकेले थे। कोई देखने वाला नहीं था।
ससुर जी ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मेरे भीगे बदन से उनकी छाती टकराई। उनकी उँगलियाँ मेरी कमर पर घूम रही थीं। “ससुर जी… ये गलत है… मैं आपकी बहू हूँ…”
“बहू तो है, लेकिन जवान औरत भी है। राहुल तो तुझे संतुष्ट नहीं कर पाता। मुझे सब पता है,” उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया।
उनकी बात सुनकर मेरी चूत में गर्मी फैल गई। ससुर जी ने मेरी साड़ी का पल्लू खींचकर गिरा दिया। गीली साड़ी मेरे कंधों से सरक गई। मेरी भारी चूचियाँ ब्रा में उभर रही थीं। उन्होंने ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी गोरी चूचियाँ बारिश में भीग रही थीं।
ससुर जी ने झुककर एक चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगे। “आह… ससुर जी… धीरे… आह…” मैं सिसकार उठी।
बारिश की बूँदें हमारे बदन पर गिर रही थीं। ससुर जी ने मेरी दूसरी चूची दबाई, चूसी और काटा। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी — बारिश से और अपनी चुदाई की प्यास से।
उन्होंने मुझे छत के एक कोने में ले जाकर दीवार से सटा दिया। मेरी साड़ी पूरी तरह कमर तक उठा दी। पैंटी गीली थी। उन्होंने पैंटी खींचकर उतार दी। मेरी चूत अब पूरी तरह खुली थी — बारिश की बूँदें उस पर गिर रही थीं।
ससुर जी घुटनों पर बैठ गए और अपनी जीभ मेरी चूत पर फेरने लगे। “पूजा… तेरी चूत कितनी स्वादिष्ट है… गीली और गरम…”
उनकी जीभ मेरी क्लिट को चूस रही थी, अंदर घुस रही थी। मैं दीवार पकड़कर चीख रही थी — “आह… ससुर जी… और चाटिए… मेरी चूत चूसिए… आह… हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है…”
मैं पहली बार झड़ गई। मेरा रस उनके मुंह में चला गया।
अब ससुर जी खड़े हो गए। उन्होंने अपनी लूंगी उतारी। उनका लंड बाहर आया — बहुत मोटा, लंबा, काला और पूरा सख्त। राहुल का लंड इसके सामने कुछ भी नहीं था।
मैंने झुककर उसे मुंह में ले लिया। बारिश में भीगते हुए मैं ससुर जी का लंड चूस रही थी। वो मेरे बाल पकड़कर मेरे मुंह में धक्के मार रहे थे। “पूजा… तू बहुत अच्छी चूसती है… आह…”
फिर उन्होंने मुझे उठाया, मेरी एक टाँग अपनी कमर पर रखी और अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रख दिया। बारिश तेज हो रही थी।
“ससुर जी… धीरे… आह…”
एक जोरदार धक्का। पूरा मोटा लंड मेरी चूत में घुस गया। “आआह… फट गई मेरी चूत… ससुर जी… बहुत मोटा है आपका लंड…”
ससुर जी ने मुझे दीवार से सटाकर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के पर मेरी चूचियाँ उछल रही थीं। बारिश की बूँदें हमारे जुड़े हुए अंगों पर गिर रही थीं। फच-फच की आवाज बारिश की आवाज में मिल रही थी।
“पूजा… तेरी चूत बहुत तंग है… मैं सालों से तुझे चोदना चाहता था… आज गीली साड़ी में तुझे छत पर चोद रहा हूँ… आह… कितनी गरम है तेरी चूत…”
मैं उनकी गर्दन में बाँहें डालकर चीख रही थी — “हाँ ससुर जी… चोदो मुझे… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… राहुल कभी नहीं दे पाता… आपका लंड ही मेरी चूत का मालिक है… आह… और तेज… चोदो अपनी बहू को…”
ससुर जी ने मुझे घुमाकर कुत्ते की तरह किया। मेरी गीली गांड ऊपर थी। उन्होंने गांड पर थप्पड़ मारा और पीछे से लंड घोंप दिया। अब वो और तेज धक्के मार रहे थे। उनकी गेंदें मेरी गांड से टकरा रही थीं।
“तुम्हारी गांड भी बहुत गोल है पूजा… एक दिन इसमें भी डालूँगा…”
उन्होंने मेरी कमर पकड़कर लगातार १५-२० मिनट तक चोदा। मैं तीन बार झड़ चुकी थी। आखिर में उन्होंने जोर-जोर से धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर गरम पानी छोड़ दिया।
लेकिन वो अभी थके नहीं थे। उन्होंने मुझे छत की चटाई पर लिटाया। बारिश अब हल्की हो गई थी। मेरी गीली साड़ी मेरे बदन पर चिपकी हुई थी। उन्होंने मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और फिर से लंड अंदर डाला।
इस बार वो बहुत धीरे और गहरे धक्के मार रहे थे। हर धक्के में पूरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। मैं कराह रही थी — “ससुर जी… आपका लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है… लेकिन बहुत मजा आ रहा है… चोदते रहिए… पूरी रात चोदिए…”
उस दिन छत पर बारिश के बीच ससुर जी ने मुझे तीन बार चोदा। हर बार लंबी और जोरदार चुदाई। मेरी चूत सूज गई थी, लेकिन खुशी से भरी हुई थी।
शाम होने से पहले हम अंदर गए। ससुर जी ने मुझे गले लगाया और बोला, “पूजा, अब जब भी राहुल बाहर जाएगा, मैं तुझे छत पर गीली साड़ी में चोदूँगा। तू अब मेरी हूँ।”
मैंने शरमाते हुए कहा, “जी ससुर जी… आपकी बहू अब आपकी रंडी है।”
उस दिन के बाद हर बारिश में मैं जानबूझकर गीली साड़ी पहनकर छत पर जाती हूँ। ससुर जी आ जाते हैं और मुझे छत पर ही चोदते हैं। राहुल को कुछ नहीं पता। मैं अब ससुर जी के मोटे लंड की दीवानी हो चुकी हूँ। पति से नहीं, ससुर जी से मुझे वो खुशी मिलती है जो मैं चाहती थी।