शादी में बुआ की चुदाई

बारात का शोर अभी भी घर के आँगन में गूँज रहा था, लेकिन रात के ढाई बज चुके थे। लाइटें धीमी हो चुकी थीं, सिर्फ़ कुछ बल्ब और दूर-दूर तक बिखरे फूलों की मालाएँ चमक रही थीं। ठंडी हवा में मिठाई की महक और अगरबत्ती का धुआँ मिलकर एक अजीब-सा नशा फैला रहा था। राधिका, जो घर की सबसे बड़ी बुआ थी, अब भी साड़ी संभालते हुए छत की तरफ़ जा रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था, क्योंकि वो बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी कि कोई आ तो नहीं रहा।

अंकित, दूल्हे का छोटा भाई, जो शहर से आया था, छत पर पहले से ही खड़ा था। वो सिगरेट का कश ले रहा था, लेकिन धुआँ बाहर की तरफ़ फेंक रहा था ताकि नीचे किसी को महसूस न हो। उसकी आँखें राधिका को देखते ही चमक उठीं। राधिका ने उसे देखा, फिर नज़रें फेर लीं। वो जानती थी कि ये गलत है। वो उसकी बुआ थी। उम्र में भी दस-बारह साल बड़ी। लेकिन आज की रात में कुछ ऐसा था जो सामान्य नहीं लग रहा था। शादी का माहौल, नाच-गाना, शराब की हल्की-हल्की महक, और वो नज़रें जो दिन भर चुपके-चुपके मिल रही थीं।

राधिका छत पर आई। उसने दरवाज़ा हल्के से बंद किया। “अंकित, इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हो?” उसकी आवाज़ में डाँट थी, लेकिन वो डाँट नकली लग रही थी। अंकित ने सिगरेट फेंक दी, मुस्कुराया। “नींद नहीं आ रही थी बुआ। शादी का जोश है। तुम भी तो सोई नहीं।”

राधिका मुंडेर के पास खड़ी हो गई। हवा उसकी साड़ी को लहरा रही थी। उसकी कमर की लकीर साफ़ दिख रही थी। अंकित की नज़र वहाँ अटक गई। वो सोच रहा था—कितनी देर से ये देख रहा हूँ। बचपन से बुआ को देखता आया हूँ, लेकिन आज पहली बार लगा कि वो सिर्फ़ बुआ नहीं, एक औरत भी है। गोरी, भरी-भरी, और वो साड़ी जो उसके शरीर पर चिपकी हुई है। उसकी चूत की गर्माहट कल्पना में महसूस हो रही थी। लेकिन वो चुप रहा।

राधिका ने भी महसूस किया वो नज़र। उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। “नीचे चलो अंकित। कोई देख लेगा तो क्या कहेगा?” लेकिन वो खुद नहीं हिली। अंकित एक कदम आगे बढ़ा। “कोई नहीं आएगा बुआ। सब सो गए हैं। दूल्हा-दुल्हन तो कमरे में बंद हैं।” उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी गहराई थी। राधिका ने सिर झुका लिया। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। वो सोच रही थी—ये क्या हो रहा है? ये मेरा भतीजा है। लेकिन आज उसकी आँखों में वो आग देखकर मन डोल रहा था। सालों से विधवा थी वो। पति की मौत के बाद कभी किसी को इतने करीब नहीं आने दिया। लेकिन आज शरीर बेकाबू हो रहा था।

ये कहानी और भी हॉट और सेक्सी है :  मॉडर्न बनने के चक्कर में चुद गई अपने छोटे भाई से खूब पेला रात भर

दोनों चुप रहे। सिर्फ़ हवा की सरसराहट और दूर से आती कोई भजन की धुन। अंकित ने धीरे से उसका हाथ छुआ। राधिका ने हाथ नहीं छुड़ाया। बस थोड़ा सा काँप गई। “अंकित… ये ठीक नहीं है।” उसकी आवाज़ काँप रही थी। अंकित ने कहा, “मैं जानता हूँ बुआ। लेकिन आज… आज कुछ अलग लग रहा है। तुम्हें देखकर… मन नहीं मान रहा।”

राधिका ने आँखें उठाईं। अंकित की आँखों में लालसा साफ़ दिख रही थी। वो नज़रें जो दिन भर चुपके से उसकी छातियों पर, कमर पर, गाँड पर टिकती रहीं। राधिका को पता था। वो खुद भी कई बार शर्मा गई थी। लेकिन अब छत पर, अकेले, वो डर कम और चाहत ज्यादा महसूस कर रही थी। अंकित ने उसका हाथ अपनी छाती पर रख दिया। “देखो बुआ… कितना तेज़ धड़क रहा है।”

राधिका ने महसूस किया उसकी धड़कन। उसकी उँगलियाँ उसकी शर्ट पर सरकीं। अंकित ने धीरे से उसकी कमर पकड़ी। साड़ी की सिलवटें उसकी उँगलियों में फँस गईं। राधिका की साँस रुक गई। “अंकित… कोई सुन लेगा।” लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध कम था। अंकित ने उसे अपनी तरफ़ खींचा। अब दोनों इतने करीब थे कि उनकी साँसें मिल रही थीं। राधिका ने आँखें बंद कर लीं। अंकित ने उसके गाल पर होंठ रख दिए। हल्का-सा चुंबन। राधिका काँप उठी। वो स्पर्श सालों बाद महसूस कर रही थी।

धीरे-धीरे अंकित के होंठ उसके गले पर सरके। राधिका ने सिसकारी ली। “आह… अंकित…” उसकी आवाज़ में अब डर नहीं, बस एक गहरी चाहत थी। अंकित ने उसकी साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज के नीचे से उसकी छातियाँ उभर आईं। अंकित की साँसें तेज़ हो गईं। वो ब्लाउज के बटन खोलने लगा। राधिका ने हाथ बढ़ाकर रोका नहीं। बस आँखें बंद कर लीं। ब्लाउज खुला। ब्रा में कैद छातियाँ बाहर आने को बेताब थीं। अंकित ने ब्रा के हुक खोले। अब वो नंगी छातियाँ चाँदनी में चमक रही थीं। अंकित ने उन्हें दोनों हाथों में भर लिया। “बुआ… कितनी नरम हैं। कितनी गरम।”

ये कहानी और भी हॉट और सेक्सी है :  मेरी दोनों बहनें लेस्बियन हैं, मैंने देखा उन दोनों को कल रात

राधिका की आह निकली। “चुप… मत बोलो।” लेकिन उसका शरीर बोल रहा था। अंकित ने निप्पल को मुँह में लिया। चूसने लगा। राधिका की उँगलियाँ उसके बालों में फँस गईं। वो पीठ झुकाकर खुद को और करीब कर रही थी। उसकी चूत में गीलापन फैल रहा था। सालों बाद कोई उसे ऐसे छू रहा था। वो सोच रही थी—ये गलत है। लेकिन कितना अच्छा लग रहा है।

अंकित ने उसे मुंडेर से थोड़ा हटाकर छत के कोने में ले जाया, जहाँ एक पुरानी चारपाई पड़ी थी। वो बैठ गया। राधिका को अपनी गोद में खींच लिया। अब राधिका उसकी गोद में बैठी थी। साड़ी ऊपर सरक गई थी। अंकित की उँगलियाँ उसकी जाँघों पर सरक रही थीं। राधिका काँप रही थी। “अंकित… नीचे लोग हैं।” अंकित ने फुसफुसाया, “कोई नहीं आएगा। बस तुम और मैं।” उसकी उँगलियाँ पैंटी के ऊपर पहुँच गईं। राधिका ने जाँघें सटा लीं। लेकिन अंकित ने धीरे से अलग किया। पैंटी गीली थी। अंकित ने कहा, “बुआ… तुम कितनी तरस रही हो। तुम्हारी चूत मेरे लिए गीली हो रही है।”

राधिका शर्मा गई, लेकिन उत्तेजना से उसकी साँसें और तेज़ हो गईं। अंकित ने पैंटी साइड से सरकाई। उँगली चूत पर रखी। राधिका की पूरी बॉडी में झटका लगा। “आह… अंकित…” वो अब विरोध नहीं कर रही थी। अंकित की उँगली अंदर सरकी। राधिका ने मुँह पर हाथ रख लिया ताकि आवाज़ न निकले। अंकित धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रहा था। राधिका की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। वो खुद को रोक नहीं पा रही थी।

फिर अंकित ने अपनी पैंट खोली। उसका लंड बाहर आया—सख्त, गर्म, नसों से भरा। राधिका ने देखा तो आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा…” वो बुदबुदाई। अंकित ने उसका हाथ पकड़कर लंड पर रख दिया। राधिका ने पहली बार छुआ। गर्माहट महसूस की। वो सहलाने लगी। अंकित की सिसकारी निकली। “बुआ… तुम्हारे हाथ कितने नरम हैं।”

ये कहानी और भी हॉट और सेक्सी है :  मेरी पहली चुदाई खेत के झोपड़े में अपने भाई से चुदाई

राधिका अब पूरी तरह सरेंडर कर चुकी थी। वो उठी, साड़ी पूरी उतार दी। अब सिर्फ़ पेटीकोट में थी। अंकित ने पेटीकोट भी खींच दिया। राधिका नंगी थी। उसकी गोरी बॉडी, भरी गाँड, गुलाबी चूत। अंकित उसे चारपाई पर लिटाया। खुद ऊपर आया। दोनों की बॉडी चिपक गईं। अंकित ने उसके होंठ चूमे। गहरा चुंबन। जीभें मिलीं। राधिका अब बिना हिचकिचाहट के जवाब दे रही थी।

अंकित ने लंड चूत पर रगड़ा। राधिका की आह निकली। “अंदर डालो… धीरे से।” अंकित ने धीरे से धक्का दिया। लंड अंदर गया। राधिका की आँखों में आँसू आ गए—दर्द और सुख दोनों से। “आह… फाड़ दो मेरी चूत अंकित।” अंकित धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। राधिका की गाँड ऊपर उठ रही थी। वो उसका साथ दे रही थी। दोनों की साँसें एक हो रही थीं। अंकित की गति तेज़ हुई। राधिका चीखने वाली थी, लेकिन मुँह दबा लिया।

वे दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे में खोए रहे। अंकित ने राधिका की गाँड को जोर से दबाया। “बुआ… तुम्हारी गाँड कितनी सेक्सी है।” राधिका ने कहा, “चुप… बस चोदो मुझे।” आखिरकार दोनों का क्लाइमेक्स आया। अंकित ने अंदर ही झड़ दिया। राधिका की बॉडी काँप उठी। वो लंबे समय तक ऐसे ही लेटी रही।

बाद में दोनों चुपचाप लेटे थे। राधिका रो रही थी। “अंकित… ये क्या कर दिया हमने?” अंकित ने उसे गले लगाया। “बुआ… मैं तुमसे प्यार करता हूँ। ये सिर्फ़ शरीर नहीं, दिल भी है।” राधिका ने कुछ नहीं कहा। बस उसकी छाती पर सिर रख दिया। नीचे से अभी भी हल्की-हल्की शहनाई की आवाज़ आ रही थी। लेकिन उनकी दुनिया अब अलग थी। वो जानते थे कि कल सुबह सब सामान्य हो जाएगा। लेकिन आज की रात हमेशा याद रहेगी। राधिका ने धीरे से कहा, “अगली बार… मत आना इतनी रात को।” लेकिन दोनों जानते थे—ये आखिरी बार नहीं था।

Comments are closed.