मेरा नाम प्रिया है। मैं अभी-अभी अट्ठारह साल की हुई हूँ। हमारे छोटे से शहर में हमारा परिवार बहुत साधारण है। पापा सरकारी नौकरी करते हैं और मम्मी घर संभालती हैं। मेरी मौसी रेखा, जो मम्मी की छोटी बहन हैं, अक्सर अपने पति यानी मेरे मौसा जी रजत के साथ हमारे यहाँ आती रहती हैं। मौसा जी की उम्र चालीस के पार है, लेकिन उनका बदन देखकर कोई भी कह सकता है कि वो अभी भी जवान मर्द हैं। लंबा कद, चौड़ी छाती, मोटी-मोटी बाहें और वो गहरी आवाज जो सुनते ही अंदर तक उतर जाती है। मौसी अक्सर मायके चली जाती हैं क्योंकि उनकी माँ बीमार रहती हैं, और मौसा जी अकेले हमारे यहाँ रुक जाते हैं।
मैं हमेशा से थोड़ी शर्मीली और डरपोक रही हूँ। मेरी चूचियाँ अभी भी बहुत छोटी हैं — सिर्फ ३२ साइज की। स्कूल और कॉलेज में लड़कियाँ मुझसे मजाक उड़ाती हैं कि “प्रिया, अभी तक तेरी चूचियाँ नहीं बढ़ीं? ब्रा पहनने की जरूरत ही नहीं है तेरे को।” मैं बाहर तो हँस देती, लेकिन अंदर से बहुत दुख होता। रात को अकेले लेटकर मैं कई बार अपनी छोटी चूचियों को सहलाती और सोचती कि काश ये थोड़ी बड़ी हो जाएँ। मम्मी कहती हैं कि समय के साथ बढ़ जाएँगी, लेकिन मुझे इंतजार बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मौसा जी जब भी घर आते, वो मुझे बहुत प्यार से देखते। “प्रिया बेटी, कितनी प्यारी हो गई है,” कहकर मेरे गाल छूते या सिर पर हाथ फेरते। शुरू में मुझे अच्छा लगता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनकी नजरें मेरी ब्लाउज पर, मेरी कमर पर और मेरी जाँघों पर देर तक टिकने लगी थीं। मैं शर्मा जाती, लेकिन अंदर कहीं एक अजीब-सी गुदगुदी भी होती।
उस दिन मौसी मायके चली गई थीं। पापा-मम्मी भी पड़ोस में किसी रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे और रात को लौटने वाले थे। घर में सिर्फ मैं और मौसा जी थे। बाहर तेज गर्मी पड़ रही थी। मैं हल्की सी स्लीवलेस टॉप और शॉर्ट्स पहने हुए थी। मौसा जी लिविंग रूम में सोफे पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे।
“प्रिया, आ बैठ मेरे पास। बहुत गर्मी है,” उन्होंने मुझे बुलाया।
मैं उनके पास बैठ गई। मौसा जी ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और धीरे से सहलाने लगे। “बेटी, तू बड़ी हो रही है, लेकिन तेरी चूचियाँ अभी भी बहुत छोटी हैं। क्या दूध, केला, बादाम कुछ नहीं खाती?” उनकी बात सुनकर मैं शर्मा गई और नजरें झुका लीं।
मौसा जी हँसे और मेरे करीब सरक आए। “अरे शर्मा मत। मैं तेरा मौसा हूँ। तेरी मदद कर सकता हूँ। मालिश से चूचियाँ बढ़ती हैं। रोज मालिश करोगी तो अच्छे से बड़ी हो जाएँगी। तू चाहे तो मैं अभी दिखा दूँ।”
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। मैं जानती थी कि ये गलत है, लेकिन उनकी गहरी आवाज और मजबूत हाथों को देखकर मैं चुप हो गई। मौसा जी ने मेरे टॉप को धीरे से ऊपर किया। मैंने ब्रा पहनी हुई थी। उन्होंने ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी छोटी, गोरी, नरम चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स हल्के गुलाबी थे और अभी से सख्त हो चुके थे।
मौसा जी ने दोनों चूचियों को अपने बड़े-बड़े हाथों में भर लिया और धीरे-धीरे मसलने लगे। “देख प्रिया, ये कितनी छोटी और नरम हैं। मैं इन्हें रोज मसलूँगा तो ये अच्छी-खासी बड़ी और भरी हुई हो जाएँगी।” उनकी उँगलियाँ मेरी चूचियों को गोल-गोल घुमा रही थीं, कभी हल्का दबाव बढ़ाते, कभी निप्पल्स को उँगलियों के बीच दबाकर सहलाते। मैं साँसें तेज कर रही थी। “मौसा जी… आह… ये क्या कर रहे हैं… अच्छा लग रहा है… लेकिन शर्म आ रही है…”
मौसा जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “शर्माने की कोई बात नहीं बेटी। मैं तुझे औरत बना रहा हूँ।” उन्होंने झुककर एक चूची को मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगे। उनकी गर्म जीभ मेरे निप्पल पर घूम रही थी, कभी हल्का-हल्का काट रही थी। मैं सिसकार उठी, “आह… मौसा जी… और चूसिए… आह… बहुत अच्छा लग रहा है… मेरी छोटी चूचियों को चूसिए…”
मौसा जी ने दोनों चूचियों को बारी-बारी चूसा, माला और जोर से मसलते रहे। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैं उनके बालों में हाथ फेर रही थी। मौसा जी ने मेरी शॉर्ट्स और पैंटी भी उतार दी। मेरी छोटी-सी चूत पर हल्के बाल थे, गुलाबी और रस से तर। उन्होंने अपनी शर्ट उतारी। उनका मजबूत, बालों वाला बदन सामने था। पैंट उतारते ही उनका लंड बाहर आ गया — बहुत मोटा, लंबा, काला और पूरी तरह खड़ा।
मौसा जी ने मुझे सोफे पर लिटा दिया। उन्होंने मेरी जाँघें फैलाईं और अपना मुंह मेरी चूत पर रख दिया। उनकी गर्म जीभ मेरी चूत की फाँक में घुस गई। वो जोर-जोर से चाटने लगे, क्लिट को चूसते, अंदर जीभ डालकर चक्कर काटते। “प्रिया… तेरी चूत कितनी मीठी और तंग है… मैं इसे चूस-चूसकर खा जाऊँगा…”
मैं कमर उठा-उठाकर चीख रही थी। “आह… मौसा जी… और चाटिए… मेरी चूत को चूसिए… हाँ… वहीं… आह… मैं झड़ने वाली हूँ…” कुछ ही देर में मैं पहली बार जोर से झड़ गई। मेरा गर्म रस उनके मुंह पर फैल गया। मौसा जी ने सब चाट लिया।
अब मौसा जी मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। पूरा सिर अंदर चला गया। मैं काँप उठी। फिर एक जोरदार धक्का — पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। “आआह… फट गई मौसा जी… बहुत मोटा है आपका लंड… आह… धीरे… आह…”
मौसा जी ने धीरे-धीरे लय बनाई। हर धक्के पर वो मेरी चूचियों को मसल रहे थे। “देख बेटी, मैं तेरी चूचियों को मसल-मसलकर बड़ा कर रहा हूँ। रोज इस तरह मालिश होगी तो ये अच्छी-खासी भरी-भरी हो जाएँगी।” वो तेज होता गया। कमरे में फच-फच की तेज आवाज गूँज रही थी। मैं चीख रही थी — “हाँ मौसा जी… और जोर से… मेरी छोटी चूत फाड़ दो… आह… चोदिए मुझे… मेरी चूचियों को और मसलिए…”
मौसा जी ने मुझे कई पोजिशन में चोदा — पहले मिशनरी में, फिर मुझे घुटनों के बल करके पीछे से, फिर गोद में उठाकर। हर बार वो मेरी चूचियों को मसलते, चूसते और कहते, “ये अब बड़ी हो जाएँगी प्रिया।” रात भर उन्होंने मुझे तीन बार चोदा। हर बार लंबी, गहरी और जोरदार चुदाई। मैं कई बार झड़ गई।
सुबह होने से पहले हम थककर लेटे थे। मौसा जी ने मेरी चूचियों को फिर से मसलते हुए कहा, “प्रिया, अब ये छोटी नहीं रहेंगी। जब भी मौसी नहीं होगी, मैं आकर तेरी चूचियों की मालिश करूँगा और तेरी चूत भी भर दूँगा।”
उस दिन के बाद मौसा जी की आदत पड़ गई। जब भी मौसी मायके जाती, मौसा जी हमारे यहाँ रुक जाते और रात को मेरी छोटी चूचियों को मसल-मसलकर बड़ा करने का बहाना करके मुझे पूरी तरह चोदते। धीरे-धीरे मेरी चूचियाँ थोड़ी बड़ी और भरी हुई होने लगीं। मैं अब मौसा जी की दीवानी हो चुकी हूँ। गले लगाने और मालिश के बहाने उन्होंने मेरी जिंदगी बदल दी।