मेरा नाम राहुल है। मैं तेईस साल का हूँ और दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मेरे बड़े भाई की शादी को चार साल हो चुके हैं। भाभी स्नेहा उनतीस साल की हैं, लेकिन उनकी जवानी देखकर कोई भी कह सकता है कि वो अभी भी पूरे फूल की तरह खिल रही हैं। गोरी चिकनी त्वचा, लंबे काले घने बाल जो उनकी कमर तक लहराते हैं, भारी-भरी चूचियाँ जो हर साड़ी के ब्लाउज में फटने को तैयार रहती हैं, पतली कमर और गोल मटोल गांड जो चलते समय लहराती हुई नजर आती है। भैया की नौकरी ऐसी है कि वो महीने में मुश्किल से चार-पाँच दिन घर आ पाते हैं। बाकी समय वो बाहर शहरों में रहते हैं। घर में ज्यादातर समय सिर्फ मैं और भाभी ही होते हैं।
शुरू के दिनों में भाभी मेरे साथ बहुत मातृ भाव से पेश आती थीं। वो मुझे अच्छा खाना बनाकर खिलातीं, मेरी छोटी-मोटी जरूरतें पूरी करतीं और भाई जैसा स्नेह दिखातीं। लेकिन पिछले एक साल से उनका व्यवहार धीरे-धीरे बदलता जा रहा था। अब वो मेरे पास ज्यादा देर तक बैठती थीं। बात करते समय मेरी जाँघ पर हाथ रख देतीं, मेरे बालों में उँगलियाँ फिरातीं, कभी मेरी आँखों में देखकर शरमाती हुई मुस्कुरातीं। उनकी आँखों में एक गहरी बेचैनी और प्यास साफ नजर आने लगी थी। मैं समझ गया था कि भाभी अंदर से बहुत तड़प रही हैं। भैया की गैरमौजूदगी ने उनकी अंतर्वासना को दिन-ब-दिन और बढ़ा दिया था। कई बार रात को मैं उनके कमरे से आती हुई सिसकारियाँ सुनता था, जब वो अकेले में खुद को राहत दे रही होती थीं।
उस दिन बाहर से तेज बारिश हो रही थी। आसमान में घने काले बादल छाए हुए थे। बिजली चमक रही थी और बारिश की बूँदें खिड़कियों पर जोर-जोर से गिर रही थीं। भैया फिर से तीन दिनों के लिए मुंबई चले गए थे। पूरा दिन घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। शाम होते-होते बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। मैं लिविंग रूम में कुछ मोमबत्तियाँ जलाकर बैठा था। भाभी रसोई से निकलकर आईं। उन्होंने हल्की सफेद साड़ी पहनी हुई थी जो उनकी गोरी त्वचा पर बहुत आकर्षक लग रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था और उनकी भारी चूचियाँ साफ उभर रही थीं।
भाभी मेरे पास आईं और बोलीं, “राहुल, आज बहुत अकेलापन लग रहा है।” उनकी आवाज में एक काँपता हुआ कंपन था। मैंने उन्हें अपने पास बिठाया। जैसे ही वो मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठीं, उनकी भारी चूचियाँ मेरी बाँह से दब गईं। मेरी साँसें तेज हो गईं। भाभी ने धीरे से मेरी कमर में हाथ डाला और और करीब आ गईं। “राहुल, तुम जानते हो ना कि भैया मुझे कितना अकेला छोड़ देते हैं।” उनकी साँसें मेरे गले पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं।
मैंने हिम्मत करके उनका चेहरा ऊपर किया। उनकी आँखों में आग थी। मैंने उनके होंठों पर किस कर लिया। भाभी ने पहले हल्का विरोध किया, लेकिन फिर खुद मेरे किस का जवाब देने लगीं। उस पल उनकी अंतर्वासना पूरी तरह भड़क गई थी। उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। “राहुल, आज मुझे रोकना मत। मुझे बहुत दिनों से किसी की जरूरत है,” उनकी आवाज में प्यास झलक रही थी।
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू सरका दिया। ब्लाउज के अंदर से उनकी भारी चूचियाँ उभर रही थीं। मैंने ब्लाउज खोल दिया। ब्रा में लिपटी उनकी गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। मैंने उन्हें दोनों हाथों में भर लिया और जोर से मसलने लगा। भाभी सिसकार रही थीं, “आह राहुल, और जोर से मसलो। सालों से कोई नहीं छुआ इनको।” मैंने झुककर उनकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। उनकी निप्पल्स मेरे मुंह में सख्त हो गईं।
भाभी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं। “राहुल, तुम बहुत अच्छा कर रहे हो।” उनकी अंतर्वासना अब पूरी तरह जाग चुकी थी। मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह उठा दी। उनकी पैंटी पहले से गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतार दी। भाभी की चूत साफ, गुलाबी और रस से तर थी। मैं घुटनों पर बैठ गया और उनकी चूत चाटने लगा। मेरी जीभ उनकी क्लिट पर घूम रही थी। भाभी कमर उठा-उठाकर चीख रही थीं, “आह राहुल, और चाटो। मेरी चूत को चूसो। हाँ वहीं, बहुत अच्छा लग रहा है।”
कुछ ही देर में भाभी पहली बार झड़ गईं। उनका गर्म रस मेरे मुंह में आ गया। मैंने सब चाट लिया। भाभी ने मुझे उठाया और मेरी पैंट उतार दी। मेरा लंड पूरा सख्त होकर खड़ा था। भाभी ने उसे मुट्ठी में पकड़ लिया। “राहुल, कितना मोटा और गर्म है तेरा लंड। भैया का तो कभी मेरा मन नहीं भरता। आज तू मुझे पूरी तरह चोद दे।”
भाभी मुझे सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे से बैठ गईं। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। “आह राहुल, कितना गहरा जा रहा है। फाड़ दो मेरी चूत।” भाभी ऊपर-नीचे उछलने लगीं। उनकी भारी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने उन्हें पकड़कर जोर से दबाया और चूसा।
बारिश की तेज आवाज के साथ भाभी की सिसकारियाँ पूरे घर में गूँज रही थीं। “राहुल, और जोर से चोदो अपनी भाभी को। आह हाँ, मेरी अंतर्वासना आज पूरी कर दो।” मैंने उन्हें पलटकर कुत्ते की तरह किया। उनकी गोल गांड ऊपर थी। मैंने गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड घोंप दिया। भाभी चीख पड़ीं। “आह फट गई, लेकिन बहुत मजा आ रहा है। और तेज चोदो।”
मैं उनकी कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मार रहा था। हर धक्के पर उनकी चूचियाँ झूल रही थीं। भाभी तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थीं। हमने कई पोजिशन बदलीं। पहले सोफे पर, फिर बेडरूम में, फिर बाथरूम में शावर के नीचे खड़े-खड़े। रात भर हम चुदाई करते रहे। भाभी कई बार झड़ चुकी थीं।
आखिरकार जब मैं उनकी चूत में गरम पानी छोड़ रहा था तो भाभी ने मुझे कसकर गले लगा लिया। “राहुल, अब मैं तेरी हूँ। भैया से मुझे कभी इतनी खुशी नहीं मिली। तू ही अब मेरी अंतर्वासना का राजा है।”
उस रात के बाद भाभी की अंतर्वासना पूरी तरह जाग चुकी थी। जब भी भैया बाहर जाते, भाभी मुझे बुलातीं और कहतीं, “राहुल, आज मेरी चूत बहुत तड़प रही है। आओ मुझे चोदो।” मैं उनकी हर इच्छा पूरी करता। उनकी चूत, चूचियाँ और गांड सब कुछ अब मेरे हो चुके थे।