रात में दीदी का जलवा और अंतर्वासना की आग

मेरा नाम आरव है और मैं चौबीस साल का जवान लड़का हूँ। हमारे पुराने दिल्ली वाले बंगले में मम्मी-पापा के साथ मेरी बड़ी दीदी अनन्या भी रहती हैं। दीदी की उम्र अट्ठाईस साल है लेकिन उनकी खूबसूरती देखकर कोई भी लड़का एक नजर में दीवाना हो सकता है। दीदी का गोरा चिकना बदन, लंबे काले घने बाल जो उनकी कमर तक लहराते हैं, भारी-भरी चूचियाँ जो हर कपड़े में उभरकर आती हैं, पतली कमर और गोल-मटोल गांड जो चलते समय लहराती हुई नजर आती है।

दीदी की शादी को तीन साल हो चुके थे लेकिन उनके पति के साथ मतभेद हो जाने के कारण तलाक हो गया और दीदी वापस घर आ गईं। तलाक के बाद दीदी काफी उदास रहने लगी थीं। वो दिन में तो सामान्य रहती थीं लेकिन रात को अक्सर अकेली बैठकर सोचती रहती थीं। मैं दीदी को हमेशा बहुत प्यार करता था। बचपन से ही हम दोनों साथ खेलते, साथ सोते और एक-दूसरे के राज़ बताते थे। लेकिन अब दीदी के बदन में आई जवानी और मेरी बढ़ती उम्र ने हमारे रिश्ते को एक नया मोड़ दे दिया था।

दीदी जब भी मेरे कमरे में आकर बैठतीं तो उनकी साड़ी या नाइट सूट उनके बदन से चिपका हुआ होता। उनकी भारी चूचियाँ मेरी बाँह से दबतीं तो मेरा मन अजीब हो जाता। मैं खुद को बार-बार समझाता कि ये मेरी दीदी हैं लेकिन अंदर से मेरी चाहत बढ़ती जा रही थी। दीदी भी शायद महसूस करती थीं कि हमारे बीच कुछ बदल रहा है। वो मेरे पास ज्यादा देर तक बैठने लगी थीं, मेरे कंधे पर सिर रखकर घंटों बातें करतीं और कभी-कभी मेरी जाँघ पर हाथ फेर देतीं। उनकी साँसें मेरे गले पर पड़तीं तो मेरा लंड अनजाने में सख्त हो जाता। रात को अकेले लेटकर मैं दीदी की याद में कई बार खुद को हल्का करता लेकिन वो खालीपन कभी नहीं भरता था।

उस रात मौसम बहुत सुहाना था। बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी। मम्मी-पापा सो चुके थे। दीदी मेरे कमरे में आईं। उन्होंने हल्का सा क्रीम कलर का नाइट सूट पहना हुआ था। सूट का कपड़ा इतना पतला और फिट था कि उनकी भारी चूचियाँ, काली ब्रा और निप्पल्स का आकार साफ दिख रहा था। दीदी मेरे बेड पर बैठ गईं और बोलीं, आरव आज रात बहुत अकेलापन लग रहा है। उनकी आवाज में एक गहरी प्यास थी जो उन्होंने पहले कभी नहीं दिखाई थी। मैंने दीदी को अपने पास खींच लिया। दीदी का सिर मेरे सीने पर था। उनकी गर्म साँसें मेरे गले पर पड़ रही थीं। मेरी बाँहें अनजाने में उनकी कमर पर चली गईं।

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धीरे-धीरे दीदी ने अपना हाथ मेरी छाती पर रख दिया। उनकी उँगलियाँ मेरी त्वचा पर घूमने लगीं। मैंने हिम्मत करके उनका चेहरा ऊपर किया। हमारी नजरें मिलीं। उस पल दीदी की अंतर्वासना की आग पूरी तरह भड़क गई थी। दीदी ने खुद मेरे होंठों पर किस कर लिया। उनका किस बहुत गहरा, भूखा और जुनूनी था। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर मेरी जीभ से खेलने लगी। मैंने दीदी को कसकर गले लगा लिया। दीदी की भारी चूचियाँ मेरी छाती से पूरी तरह दब रही थीं। हम दोनों के बदन एक-दूसरे से चिपके हुए थे। दीदी की साँसें तेज हो गई थीं।

मैंने दीदी का नाइट सूट का टॉप धीरे से ऊपर किया। दीदी ने ब्रा नहीं पहनी थी। उनकी भारी गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने उन्हें दोनों हाथों में भर लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। दीदी सिसकार रही थीं। आह आरव और जोर से मसलो। सालों से किसी ने इनको ठीक से नहीं छुआ। मैंने झुककर उनकी एक चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। मेरी जीभ उनके निप्पल पर घूम रही थी। कभी हल्का-हल्का काट रहा था। दीदी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और कराह रही थीं। उनकी दूसरी चूची को मैं हाथ से दबा रहा था।

दीदी अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी छाती पर किस करने लगीं। उनकी गर्म जीभ मेरी त्वचा पर घूम रही थी। मैंने दीदी को बेड पर लिटा दिया। उनकी नाइट सूट की पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतार दी। दीदी की चूत साफ, गुलाबी और रस से तर थी। मैं घुटनों पर बैठ गया और अपनी जीभ उनकी चूत पर फेर दी। दीदी कमर उठा-उठाकर चीखने लगीं। आह आरव और चाटो। मेरी चूत को चूसो। हाँ वहीं। बहुत अच्छा लग रहा है। मेरी जीभ उनकी क्लिट पर तेजी से घूम रही थी। कभी अंदर घुसकर चक्कर काट रही थी। दीदी की जाँघें मेरे सिर को दबा रही थीं।

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कुछ ही देर में दीदी पहली बार जोर से झड़ गईं। उनका गर्म रस मेरे मुंह में आ गया। मैंने सब चाट लिया। दीदी ने मुझे उठाया और मेरी पैंट उतार दी। मेरा लंड पूरा सख्त होकर खड़ा था। दीदी ने उसे हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगीं। आरव कितना मोटा और गर्म है तेरा लंड। आज इसे मेरी चूत में डाल दो। दीदी ने मुझे बेड पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। आह आरव कितना गहरा जा रहा है। फाड़ दो अपनी दीदी की चूत। दीदी ऊपर-नीचे उछलने लगीं। उनकी भारी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने उन्हें पकड़कर जोर से दबाया और चूसा।

बारिश की तेज आवाज के साथ दीदी की सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। आरव और जोर से चोदो अपनी दीदी को। मेरी अंतर्वासना की आग बुझा दो। मैंने दीदी को पलटकर कुत्ते की तरह किया। उनकी गोल गांड ऊपर थी। मैंने गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड घोंप दिया। दीदी चीख पड़ीं। आह फट गई लेकिन बहुत मजा आ रहा है। और तेज चोदो। मैं दीदी की कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मार रहा था। हर धक्के पर दीदी की चूचियाँ झूल रही थीं। दीदी तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थीं। हमने कई पोजिशन बदले। कभी मैं ऊपर, कभी दीदी ऊपर, कभी दीवार से सटाकर खड़े-खड़े, कभी फर्श पर चटाई बिछाकर।

रात काफी गहरा चुकी थी। दीदी कई बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी। मैंने दीदी को गोद में उठा लिया। दीदी मेरी गोद में बैठकर उछलने लगीं। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के सामने उछल रही थीं। मैं उन्हें चूसता और दीदी की गांड पर थप्पड़ मारता। दीदी पागल होकर उछल रही थीं। आरव मैं तेरी हूँ। तेरी दीदी तेरी रंडी है। चोद मुझे पूरी रात। मेरी अंतर्वासना की आग को बुझा दो। मैंने दीदी को फिर से पलटा और पीछे से जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। दीदी की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गई थीं।

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आखिरकार जब मैं दीदी की चूत में अपना गरम पानी छोड़ रहा था तो दीदी ने मुझे कसकर गले लगा लिया। आरव आज तूने मेरी सालों की अंतर्वासना की आग बुझा दी। अब मैं तेरी हूँ। उस रात हम दोनों थककर एक-दूसरे की बाँहों में लेटे रहे। दीदी का सिर मेरे सीने पर था। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को हल्के-हल्के सहला रही थीं। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी। कमरे में सिर्फ हम दोनों की साँसें और बारिश की आवाज गूँज रही थी।

उस रात के बाद दीदी की अंतर्वासना पूरी तरह मेरे नाम हो गई। जब भी मौका मिलता दीदी मुझे अपने कमरे में बुलातीं और कहतीं आरव आज रात मेरी चूत बहुत तड़प रही है। आओ मुझे चोदो। मैं उनकी हर इच्छा पूरी करता। दीदी अब दिन में भाई-बहन का रिश्ता निभातीं लेकिन रात को मेरी दीदी मेरी हो जातीं। उनकी चूत, चूचियाँ, गांड सब कुछ अब मेरे हो चुके थे। दीदी की अंतर्वासना की आग रात में दीदी के जलवे के साथ और भी तेज जलती थी और हम दोनों उस आग में जलकर एक हो जाते थे।